Samachar Nama
×

सत्ता परिवर्तन अपरिहार्य है और यह एक स्वाभाविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है: 'सामना' में शिवसेना (यूबीटी)

सत्ता परिवर्तन अपरिहार्य है और यह एक स्वाभाविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है: 'सामना' में शिवसेना (यूबीटी)
सत्ता परिवर्तन अपरिहार्य है और यह एक स्वाभाविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है: 'सामना' में शिवसेना (यूबीटी)

मुंबई, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से सोमवार को कहा गया कि राजनीतिक बदलाव, या "सत्ता परिवर्तन", एक अनिवार्य संवैधानिक प्रक्रिया है और इसका होना तय है।

पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' में कहा, "उनके पापों का घड़ा भर चुका है। नतीजतन, उनके मन में 'तिरंगा आंदोलन' का विरोध करने का कुविचार आया। इस घटना ने 'सत्ता परिवर्तन' की गति को और तेज कर दिया।"

'सामना' में दावा किया गया है कि भारत में तिरंगा फहराने का विरोध करने वालों के शासन को उखाड़ फेंकना होगा, तभी "सत्ता परिवर्तन" संभव है, और यह "सत्ता परिवर्तन" होकर रहेगा। जनता ने इसका फैसला कर लिया है।

शिवसेना (यूबीटी) की ओर से 'सामना' में लिखा गया, "संविधान के नाम पर झूठी शपथ लेने से अब कोई फायदा नहीं होगा।" राजनीतिक बदलाव की वकालत करते हुए, संपादकीय में दोहराया गया कि लोकतांत्रिक विकास में सत्ता परिवर्तन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसमें इतिहास के उदाहरण दिए गए, जैसे भारत में अतीत के राजनीतिक बदलाव (गठबंधन, आपातकाल के दौरान हुए आंदोलन और उसके बाद की राजनीतिक उथल-पुथल) साथ ही दुनिया भर के ऐसे उदाहरण भी दिए गए जहां सरकारों में नेतृत्व परिवर्तन हुआ।

संपादकीय में कहा गया, "अगर विपक्ष अब यह कह रहा है कि गलत तरीके से सत्ता में आई सरकार को बदल दिया जाना चाहिए, तो इसमें गलत क्या है? केंद्र व राज्य सरकार शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक आंदोलनों को अराजकता मानती हैं, जबकि भाजपा की ओर से अब तक किए गए सभी आंदोलन इसी तरह थे। आपातकाल के दौरान, उनका 'जन संघ' जनता पार्टी में इसलिए मिलाया गया था ताकि सत्ता परिवर्तन किया जा सके।"

संपादकीय में आगे कहा गया, "वी.पी. सिंह ने राजीव गांधी के खिलाफ बगावत की और 'जनता दल' बनाया, और उस कोशिश में भाजपा के सदस्य वी.पी. सिंह को बढ़ावा दे रहे थे। इसका मूल उद्देश्य सत्ता परिवर्तन के अलावा और कुछ नहीं था। भाजपा ने 'सभ्य प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह' के खिलाफ जो अभियान चलाया था, उसका एकमात्र मकसद 'सत्ता परिवर्तन' ही था।"

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र में आगे कहा गया, "सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ होने वाले विपक्षी आंदोलनों का मकसद हमेशा सत्ता परिवर्तन लाना होता है, और इसी मुद्दे पर विश्व युद्ध भी लड़े गए हैं। ईरान में सत्ता परिवर्तन लाना राष्ट्रपति ट्रंप का लक्ष्य था, जिसके लिए अमेरिका ने ईरान पर सैकड़ों बम गिराए। राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार कहा, 'हम ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं,' लेकिन वे ऐसा करने में सफल नहीं हो सके।"

'सामना' के संपादकीय में तर्क दिया गया है कि सरकार में बदलाव की इच्छा रखना और उसके लिए संघर्ष करना एक जीवंत लोकतंत्र की मुख्य विशेषताएं हैं।

--आईएएनएस

एसडी/एएस

Share this story