Samachar Nama
×

कमोडिटी डेरिवेटिव्स में बैंकों-बीमा कंपनियों की एंट्री के पक्ष में नहीं आरबीआई और आईआरडीएआई: सेबी प्रमुख

मुंबई, 4 मई (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) बैंकों और बीमा कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में भागीदारी की अनुमति देने के पक्ष में नहीं हैं। यह जानकारी सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को दी।
कमोडिटी डेरिवेटिव्स में बैंकों-बीमा कंपनियों की एंट्री के पक्ष में नहीं आरबीआई और आईआरडीएआई: सेबी प्रमुख

मुंबई, 4 मई (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) बैंकों और बीमा कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में भागीदारी की अनुमति देने के पक्ष में नहीं हैं। यह जानकारी सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को दी।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में आयोजित आईएमसी कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस के दौरान सेबी चेयरमैन पांडे ने कहा कि दोनों नियामकों के पास अपने इस रुख के पीछे 'ठोस कारण' हैं और फिलहाल वे इस सेगमेंट के प्रति सकारात्मक नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि खासतौर पर बीमा क्षेत्र एक लंबी अवधि का कारोबार है और यह चिंता बनी हुई है कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स इस तरह के निवेश के साथ किस तरह तालमेल बैठाएंगे।

पांडे ने आगे कहा, "सेबी को इस मुद्दे पर बैंकिंग और बीमा नियामकों के साथ बातचीत के दौरान सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, क्योंकि इस सेगमेंट को लेकर कुछ चिंताएं मौजूद हैं।"

उन्होंने डिजिटल और तकनीकी जोखिमों पर भी चिंता जताई। पांडे ने कहा, "एल्गोरिदम इंसानों के नियंत्रण से ज्यादा तेजी से काम कर सकते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी का माध्यम बन सकते हैं।"

उन्होंने आगे यह भी कहा कि नई पीढ़ी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स जहां कमजोरियों की पहचान करने में मददगार हैं, वहीं वे बड़े पैमाने पर और तेजी से इन कमजोरियों का दुरुपयोग भी कर सकते हैं।

सीकेवाईसी 2.0 की प्रगति पर बात करते हुए, जिसका उद्देश्य पूरे वित्तीय क्षेत्र में एकीकृत केवाईसी सिस्टम लागू करना है, पांडे ने कहा कि यह पहल अभी विकास के चरण में है।

इस प्रयास का नेतृत्व सेंट्रल रजिस्ट्री ऑफ सिक्योरिटाइजेशन एसेट रिकंस्ट्रक्शन एंड सिक्योरिटी इंटरेस्ट (सीईआरएसएआई) कर रहा है, जिसमें विभिन्न नियामकों के सुझाव भी शामिल किए जा रहे हैं।

सेबी ने हाल ही में सीईआरएसएआई के साथ बैठक कर उन प्रमुख मुद्दों की पहचान की है, जिन्हें हल करने की जरूरत है, और उम्मीद जताई है कि जुलाई के अंत तक सीकेवाईसी 2.0 के लिए एक ढांचा तैयार हो सकता है।

इस बीच, पिछले महीने आईएमएफ-विश्व बैंक की स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पांडे ने कहा था कि भारत के पूंजी बाजार को अब एक स्थिर, मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने 17 अप्रैल को कहा था, "भारतीय बाजार अब वित्तीय प्रणाली का एक मजबूत स्तंभ बन चुके हैं, जो मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक आधार और लगातार बढ़ते निवेशक आधार के समर्थन से आगे बढ़ रहे हैं।"

--आईएएनएस

डीबीपी

Share this story

Tags