नकल माफिया पर नकेल: लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल
नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। लोकसभा के बाद राज्यसभा ने गुरुवार को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल' पास कर दिया। इसके साथ ही सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के उपायों को मजबूत करने वाले इस कानून को संसद की मंजूरी मिल गई है।
बिल पास होने के समय केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सदन में मौजूद थे। जितेंद्र सिंह ने ही दिन में यह बिल पेश किया था, जिसे लोकसभा ने बुधवार को लगभग सात घंटे की बहस के बाद पास कर दिया था।
उच्च सदन में हुई चर्चा में दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी। सरकार ने संशोधनों का बचाव करते हुए कहा कि पेपर लीक करने वाले माफिया को रोकने के लिए सख्त सजा, विशेष अदालतें और तय समय-सीमा में मुकदमे की सुनवाई जरूरी है।
आर्थिक दंड (जुर्माना) बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया गया है, साथ ही जेल की सजा और तेजी से सुनवाई (फास्ट-ट्रैक कार्यवाही) का भी प्रावधान किया गया है।
बिल पेश करते हुए जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि इन संशोधनों से पता चलता है कि सरकार 2024 के कानून के अनुभव से सीखने को तैयार है। उन्होंने बताया कि मूल कानून लागू होने के बाद से 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं और पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं की घटनाओं में कमी आई है।
राज्यसभा में बिल पास होने के बाद अब इसके राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है।
उच्च सदन में हुई बहस के दौरान तीखी नोक-झोंक देखने को मिली, जिसमें विपक्ष के सदस्यों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की आलोचना की और ढांचागत सुधारों की मांग की।
वहीं, दूसरी ओर सत्ता पक्ष ने छात्रों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता, पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में टास्क फोर्स के गठन और गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को तुरंत रद्द करके दोबारा आयोजित करने जैसे कदमों का जिक्र किया।
दोनों सदनों से पेपर लीक विरोधी बिल पास होने के बाद उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इसमें किए गए बदलावों को नोटिफाई करेगी। सत्ता पक्ष इस कानून को परीक्षाओं में बार-बार होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ एक व्यापक कदम के तौर पर पेश कर रहा है।
वहीं, दूसरी ओर, विपक्ष सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन में बड़े स्तर पर सिस्टम में सुधार और इसमें शामिल एजेंसियों की ज्यादा जवाबदेही की मांग कर रहा है।
--आईएएनएस
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