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ईंधन संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान हाई कोर्ट 3 दिनों तक वर्चुअल सुनवाई करेगा

जयपुर, 21 मई (आईएएनएस)। ईंधन की खपत कम करने और परिचालन लागत घटाने के उद्देश्य से राजस्थान उच्च न्यायालय प्रशासन ने जोधपुर प्रधान पीठ और जयपुर पीठ दोनों में तीन दिनों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालती कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया है।
ईंधन संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान हाई कोर्ट 3 दिनों तक वर्चुअल सुनवाई करेगा

जयपुर, 21 मई (आईएएनएस)। ईंधन की खपत कम करने और परिचालन लागत घटाने के उद्देश्य से राजस्थान उच्च न्यायालय प्रशासन ने जोधपुर प्रधान पीठ और जयपुर पीठ दोनों में तीन दिनों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालती कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया है।

रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा द्वारा बुधवार को जारी एक नोटिस में कहा गया है कि एक पायलट पहल के तौर पर 22 मई, 26 मई और 27 मई को मामलों की सुनवाई वर्चुअली की जाएगी।

यह फैसला भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा 12 मई को जारी एक ज्ञापन और साथ ही 15 मई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी एक सर्कुलर के बाद लिया गया है। इन दोनों का ही मुख्य उद्देश्य सभी संस्थानों में बिना किसी रुकावट के न्यायिक कामकाज सुनिश्चित करते हुए ईंधन संरक्षण को बढ़ावा देना था।

आदेश के अनुसार, जोधपुर प्रिंसिपल बेंच और जयपुर बेंच के तहत काम करने वाली सभी अदालतों में कार्यवाही निर्धारित तारीखों पर कोर्ट रूम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी।

हालांकि, राजस्थान हाई कोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रत्यक्ष (फिजिकल) सुनवाई पूरी तरह से बंद नहीं की जाएगी, और संबंधित अदालतों द्वारा जब भी आवश्यक समझा जाएगा, तब भी ऐसी सुनवाई हो सकेगी।

इस पहल को जोधपुर प्रिंसिपल बेंच और जयपुर बेंच, दोनों के हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के साथ परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया।

हाई कोर्ट प्रशासन ने वकीलों, मुकदमों से जुड़े लोगों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े अन्य हितधारकों से भी अपील की है कि वे जहां भी संभव हो, वर्चुअल सुनवाई का विकल्प चुनकर ईंधन संरक्षण की इस पहल में सहयोग करें।

सुनवाई में वर्चुअल भागीदारी को प्रोत्साहित करने के अलावा, वकीलों और अदालत आने वाले लोगों को यह भी सलाह दी गई है कि वे पेट्रोल और डीजल की खपत बचाने के प्रयास में अनावश्यक यात्रा कम करें और 'व्हीकल-पूलिंग' (एक ही गाड़ी में कई लोगों का सफर करना) के तरीकों को अपनाएं।

यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईंधन संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता और लागत-कुशल प्रशासनिक कामकाज से संबंधित चिंताओं पर अब सभी संस्थानों में अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

यह पहल उस घटना के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है, जब जस्टिस समीर जैन को राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर बेंच तक साइकिल से जाते हुए देखा गया था। इस कदम ने ईंधन संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता की ओर जनता का काफी ध्यान आकर्षित किया था।

कानूनी हलकों का मानना ​​है कि यदि यह पायलट पहल सफल साबित होती है तो भविष्य की प्रशासनिक योजनाओं में हाइब्रिड या वर्चुअल कामकाज को बढ़ावा देने वाले इसी तरह के उपायों पर अधिक बार विचार किया जा सकता है, विशेष रूप से उन स्थितियों में जहां प्रत्यक्ष उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।

साथ ही, हाई कोर्ट प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि न्यायिक कार्य और न्याय तक पहुंच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं कि निर्धारित वर्चुअल सुनवाई के दिनों में भी न्यायिक कार्यवाही सुचारू रूप से चलती रहे।

--आईएएनएस

डीकेएम/डीकेपी

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