ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीति तेज, यूएन प्रमुख ने निजी दूत नियुक्त किया
संयुक्त राष्ट्र, 25 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान युद्ध को खत्म कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करते हुए बुधवार को एक निजी दूत नियुक्त किया है, जो शांति वार्ता और मध्यस्थता को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
गुटेरेस ने उम्मीद जताई कि भले ही संघर्ष में शामिल पक्षों के बीच मतभेद हैं, लेकिन “इस भयानक युद्ध को खत्म करने के लिए कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।” हालांकि, चौथे सप्ताह में पहुंच चुके इस संघर्ष को समाप्त करने की कूटनीतिक तस्वीर अभी भी स्पष्ट नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और प्रगति हो रही है, लेकिन तेहरान ने ऐसी किसी भी वार्ता से इनकार किया है। ईरान की सेना ने तो यहां तक कहा कि अमेरिका “खुद से ही बातचीत कर रहा है।”
रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने तीसरे पक्ष के जरिए 15 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। वहीं उपराष्ट्रपतिजेडी वैन्स, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर भी वार्ता में शामिल हो सकते हैं।
इस बीच इजरायल ने बुधवार को ईरान पर हमले जारी रखे, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में कुछ ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैनिकों को मजबूत करने के लिए पैराट्रूपर्स भेजने की तैयारी की है।
गुटेरेस ने चेतावनी दी कि “दुनिया एक बड़े युद्ध, बढ़ते मानवीय संकट और वैश्विक आर्थिक झटके के खतरे के सामने खड़ी है।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कई मध्यस्थ सक्रिय हैं और शांति के प्रयास जारी हैं।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बताया कि उनके निजी दूत जीन अर्नाल्ट सीधे जमीनी स्तर पर काम करेंगे और सभी पक्षों से संपर्क बनाकर शांति और मध्यस्थता के प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे।
गुटेरेस ने कहा कि यह संघर्ष क्षेत्रीय स्तर पर नागरिकों के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है, जिससे खासकर कम विकसित देशों को भारी नुकसान हो रहा है।
अमेरिका और इजरायल को संदेश देते हुए, उन्होंने कहा कि “अब युद्ध खत्म करने का समय आ गया है,” जबकि ईरान से अपील की कि वह उन पड़ोसी देशों पर हमले बंद करे जो इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं।
उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे तनाव बढ़ाने के बजाय कूटनीति का रास्ता अपनाएं और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करें।
--आईएएनएस
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