रायपुर सेप्टिक टैंक हादसा: एनएचआरसी ने 3 सफाई कर्मचारियों की मौत का स्वतः संज्ञान लिया
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में एक निजी अस्पताल में सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय तीन सफाई कर्मचारियों की हुई मौत से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है।
यह देखते हुए कि अगर न्यूज रिपोर्ट की बातें सच हैं, तो उनसे पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा उठता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रायपुर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को नोटिस जारी कर दो हफ्तों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
एनएचआरसी ने कहा कि रिपोर्ट में इस घटना की चल रही जांच की स्थिति भी शामिल होने की उम्मीद है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 17 मार्च को हुई थी, जब एक निजी अस्पताल परिसर में सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय जहरीली गैस से कथित तौर पर तीन सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई थी।
खबरों के मुताबिक, मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि न तो अस्पताल प्रबंधन और न ही निजी ठेकेदार ने कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए थे।
इस बीच, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इन मौतों पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।
अनुसूचित जाति विकास विभाग के तत्वावधान में 'हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013' के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए गठित राज्य निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए, मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि छत्तीसगढ़ सरकार निर्देश जारी करेगी, जिसके तहत सीवर में प्रवेश करने से पहले संबंधित नगर निकाय या पंजीकृत संस्थाओं से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री साय ने ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के भी आदेश दिए।
'मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993' के तहत स्थापित एनएचआरसी एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है, जो मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के प्रति भारत की चिंता का प्रतीक है।
इसकी प्राथमिक भूमिका मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन करना है। मानवाधिकारों को उन अधिकारों के रूप में परिभाषित किया गया है जो व्यक्तियों के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित हैं, जो संविधान द्वारा गारंटीकृत हैं या अंतर्राष्ट्रीय संधियों में निहित हैं और भारत की अदालतों द्वारा लागू किए जा सकते हैं।
मानवाधिकारों की इस सर्वोच्च संस्था के पास मीडिया रिपोर्टों, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर, मानवाधिकारों के उल्लंघन की कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त किए बिना भी, स्वतः संज्ञान लेने की शक्ति है।
--आईएएनएस
पीएसके

