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राहुल गांधी भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए सोरोस से फंड ले रहे हैं : बोम्मई

राहुल गांधी भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए सोरोस से फंड ले रहे हैं : बोम्मई
राहुल गांधी भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए सोरोस से फंड ले रहे हैं : बोम्मई

हुबली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने बुधवार को आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस से फंडिंग मिल रही है और वह भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने का काम कर रहे हैं।

मीडिया को दिए गए एक बयान में, बोम्मई ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक 'कुंठित' राजनेता बताया, जिन्हें अपनी गलतियों का दोष दूसरों पर मढ़ने की आदत हो गई है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विदेशी संगठनों से संबंध हैं और वे भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाले समूहों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता पर बार-बार भारत के खिलाफ बयान देने और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आलोचना करने का भी आरोप लगाया।

बोम्मई ने आरोप लगाया कि हर कोई सोरोस के साथ उनके संबंधों के बारे में जानता है। खबर है कि सोरोस के जरिए करोड़ों रुपए आए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों और अभियानों के माध्यम से, राहुल गांधी उन लोगों को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने उन्हें फंड दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी को विदेशी फंड मिल रहा है और इस पैसे का इस्तेमाल भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने तथा देश की अखंडता और एकता को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनका मकसद हमारे लोकतंत्र को कमजोर करना और भारत की एकता व अखंडता को नुकसान पहुंचाना है।

प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करते हुए, बोम्मई ने उन्हें एक समर्पित देशभक्त बताया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में लगा दिया है।

उन्होंने दावा किया कि एक ऐसे प्रधानमंत्री पर बेबुनियाद आरोप लगाना, जिन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया और अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया, पूरे भारत के देशभक्त लोगों का अपमान करने के समान है। सूर्य की तुलना किसी और रोशनी से नहीं की जा सकती, देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के मामले में वे सूर्य के समान हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए उन बयानों और आरोपों को कोई महत्व देने की जरूरत नहीं है, जो पूरी तरह से अर्थहीन हैं।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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