क्वाड का बड़ा ऐलान: एआई के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की मदद, खनिज रिसाइक्लिंग पर 10 मिलियन डॉलर खर्च करेगा अमेरिका
अटलांटा, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और उसके क्वाड सहयोगियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तक पहुंच बढ़ाने के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की योजना का ऐलान किया है। इसके साथ ही अमेरिका ने भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में महत्वपूर्ण खनिजों की रिसाइक्लिंग के लिए 10 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है।
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने शनिवार को कई नई पहलों की घोषणा की। इनमें बिजनेस लीडर्स फोरम का गठन, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों की पहचान, समुद्री सहयोग का विस्तार और साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क को खत्म करने की प्रतिबद्धता शामिल है। चारों देशों ने आर्थिक दबाव बनाने और मनमाने निर्यात प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई।
ये घोषणाएं अटलांटा में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के बीच हुई बैठक के बाद की गईं। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में आर्थिक सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, समुद्री सहयोग और आपदा प्रबंधन से जुड़ी पहलों का खाका पेश किया गया।
क्वाड देशों ने भरोसेमंद तकनीक तक पहुंच बढ़ाने के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का इरादा जताया। इसमें क्वाड एसआई एक्सेलेरेटर के माध्यम से सहयोग भी शामिल है। बयान में 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसके फुटनोट में स्पष्ट किया गया कि ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के संदर्भ में इसका मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) है। हालांकि, संयुक्त बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चारों देश अलग-अलग कितनी राशि का योगदान करेंगे और इस सहायता का वितरण किस तरह होगा।
चारों देश सेमीकंडक्टर और एआई आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं और कमजोर कड़ियों की पहचान करने के लिए भी काम करेंगे, ताकि किसी संकट से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने उन्नत सेमीकंडक्टर और एआई हार्डवेयर की सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। इसके अलावा 5जी, 6जी, ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क (ओपन आरएएन) और एआई आधारित रेडियो एक्सेस नेटवर्क के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्राथमिकता वाले देशों की पहचान की जाएगी। भरोसेमंद 5जी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और एआई आधारित नेटवर्क में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करने के लिए क्वाड देशों ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे और कबाड़ से खनिज निकालने की पहल को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस दिशा में अमेरिका ने भारत और आसियान देशों में बुनियादी ढांचे और ऐसी सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए 10 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है, जहां कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा प्राप्त किया जा सके।
चारों देश कचरा संग्रह नेटवर्क, प्रोसेसिंग प्लांट और रिफाइनरी में निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करेंगे। इसके साथ ही रिसाइक्लिंग योग्य सामग्री के सीमा पार आयात और निर्यात की प्रक्रियाओं को सरल बनाने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। संयुक्त बयान में क्वाड देशों ने मनमाने निर्यात प्रतिबंधों सहित आर्थिक दबाव बनाने की गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने ऐसी गैर-बाजार नीतियों और तौर-तरीकों की भी आलोचना की, जिनसे जरूरत से अधिक उत्पादन होता है और महत्वपूर्ण उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है। हालांकि, इस संदर्भ में किसी देश का नाम नहीं लिया गया।
क्वाड का पहला बिजनेस लीडर्स फोरम गठित किया जाएगा। इसमें उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी और नीति विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसका उद्देश्य चारों देशों के बीच व्यावसायिक संबंध मजबूत करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कारोबारी समझौतों को बढ़ावा देना है। क्वाड देशों की निर्यात ऋण एजेंसियों की बैठक 18 नवंबर को टोक्यो में होगी, जिसमें व्यावहारिक सहयोग के अवसरों की पहचान की जाएगी। चारों देशों ने सितंबर में आयोजित पहले क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम की भी समीक्षा की। इसमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ईंधन के स्टॉक को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
समुद्री सहयोग के तहत क्वाड देश फिजी के सुवा, लाउटोका और रोकाबिली बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में सहयोग कर रहे हैं। अमेरिकी मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन बंदरगाह विकास की रूपरेखा तैयार करने में मदद कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया एक नए ट्रांसशिपमेंट पोर्ट की व्यवहार्यता का आकलन कर रहा है। चारों देशों ने प्रशांत क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया में अब तक 2,000 से अधिक बुनियादी ढांचा फेलोशिप प्रदान की हैं। इसके अलावा सुरक्षित और तेज गति वाले समुद्र के नीचे बिछाए जाने वाले इंटरनेट केबल नेटवर्क विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
क्वाड मंत्रियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और जहाजों तथा उनके चालक दल की सुरक्षित आवाजाही निर्बाध रहनी चाहिए। इसके लिए किसी तरह का टोल नहीं लगाया जाना चाहिए।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने के लिए दूसरा 'क्वाड एट सी शिप ऑब्जर्वर मिशन' 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच चेन्नई से पर्थ तक चला। इसमें चारों देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय तटरक्षक बल के एक अपतटीय गश्ती पोत पर यात्रा की। इसका उद्देश्य अवैध समुद्री गतिविधियों के खिलाफ सहयोग बढ़ाना था।
क्वाड देश 'सी ड्रैगन 2027' के तहत हिंद-प्रशांत समुद्री निगरानी सहयोग पहल का पहला अभ्यास आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा 2027 की शुरुआत में समुद्री प्रशिक्षण पहल (मैत्री) के तहत पहला क्वाड मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस ट्रैक 1.5 सिम्पोजियम आयोजित किया जाएगा। इसमें क्षेत्रीय साझेदार समुद्री निगरानी, तकनीक और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा करेंगे।
क्वाड देशों ने लोगों की तस्करी करने और उन्हें ऑनलाइन ठगी के लिए मजबूर करने वाले आपराधिक समूहों की निंदा की। उन्होंने कहा कि इन नेटवर्कों के कारण चारों देशों के नागरिकों को हर साल अरबों डॉलर का नुकसान होता है। चारों देशों ने ऐसे साइबर ठगी नेटवर्क को खत्म करने और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों तथा उनके सरगनाओं को जवाबदेह ठहराने की प्रतिबद्धता जताई।
जापान के विदेश मंत्री मोतेगी ने बैठक में पूर्वी चीन सागर, दक्षिण चीन सागर और मध्य पूर्व की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने बल प्रयोग या दबाव के जरिए मौजूदा स्थिति को एकतरफा बदलने के प्रयासों का विरोध किया। उन्होंने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण और उसकी दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों से निपटने की जरूरत पर भी जोर दिया।
क्वाड मंत्रियों ने नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ में हुई मौतों पर शोक जताया। उन्होंने इस आपदा के दौरान प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश के रूप में भारत की अग्रणी भूमिका और अन्य क्वाड देशों की महत्वपूर्ण सहायता को भी स्वीकार किया। ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका नवंबर में भारत के वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभ्यास में पर्यवेक्षक भेजेंगे।
इसके अलावा जापान के रक्षा मंत्रालय की मेजबानी में सितंबर में आयोजित टेबलटॉप अभ्यास के दौरान हिंद-प्रशांत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को लेकर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। अगले रिम ऑफ द पैसिफिक (रिमपैक) अभ्यास के दौरान लॉजिस्टिक्स सहयोग को और आगे बढ़ाने की योजना है।
गौरतलब है कि अटलांटा में हुई यह बैठक जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर आयोजित की गई और जापान के अनुसार, करीब 40 मिनट तक चली। इस साल यह क्वाड विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक थी। इससे पहले मई और जुलाई में बैठकें हुई थीं। चारों देशों के मंत्रियों ने आगामी क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन और अगली मंत्री स्तरीय बैठक को लेकर भी उम्मीद जताई। महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ा ढांचा और समुद्री निगरानी सहयोग पहल की घोषणा मई 2026 में की गई थी, जबकि निर्यात ऋण एजेंसियों के बीच सहयोग 2024 के एक समझौता ज्ञापन पर आधारित है।
--आईएएनएस
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