पंजाब सरकार गेहूं की खरीद में विफल रही: रवनीत सिंह बिट्टू
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए रेल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सोमवार को कहा कि आप सरकार गेहूं की खरीद में विफल रही है।
उन्होंने राज्य प्रशासन पर आपराधिक लापरवाही, घोर कुप्रबंधन, किसानों और खेत मजदूरों को जान-बूझकर परेशान करने का आरोप लगाया।
बिट्टू ने कहा कि जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने सुचारू खरीद के लिए हर संभव व्यवस्था की है। वहीं, पंजाब सरकार ने अपनी अक्षमता और किसान-विरोधी मानसिकता को उजागर कर दिया है।
बिट्टू ने एक बयान में कहा, "केंद्र सरकार ने पंजाब के लिए 30,973 करोड़ रुपए की भारी-भरकम कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) मंजूर कर दी है। लॉजिस्टिक्स और खरीद से जुड़े सभी इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए गए थे, फिर भी किसानों को 'मंडियों' में सोने पर मजबूर होना पड़ रहा है; उनकी फसल बिना किसी देखरेख के पड़ी है। मजदूरों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है, क्योंकि पंजाब सरकार हर मोर्चे पर नाकाम रही है।"
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 4.88 लाख बेल (1 बेल = 500 बोरी) आवंटित किए हैं। साथ ही, जरूरत पड़ने पर जेम पोर्टल के जरिए अतिरिक्त स्टॉक खरीदने की अनुमति भी दी है।
केंद्र सरकार ने गुणवत्ता संबंधी मानकों में भी ढील दी है, ताकि किसी भी किसान को नुकसान न हो। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र से पूरा समर्थन मिलने के बावजूद, पंजाब सरकार के पास अब कोई बहाना नहीं बचा है। अगर बोरियां उपलब्ध हैं, भंडारण की जगह बनाई गई है, सीसीएल स्वीकृत है और खरीद के नियमों में ढील दी गई है, तो फिर गेहूं की खरीद समय पर क्यों नहीं हो रही है?
बिट्टू ने एफसीआई और भारतीय रेलवे द्वारा अनाज के मौजूदा स्टॉक को हटाकर भंडारण के लिए जगह बनाने में निभाई गई सक्रिय भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मैंने अप्रैल महीने के दौरान अनाज की रोजाना की आवाजाही पर खुद नजर रखी। 26 अप्रैल तक, पंजाब से 275 रैक भेजे गए, जिनमें 109 चावल के और 166 गेहूं के रैक थे। इसी अवधि में हरियाणा से केवल 131 रैक भेजे गए। रेलवे पूरी तरह से तैयार है कि जब भी एफसीआई हमें सूचित करेगा, हम कुछ ही घंटों के भीतर और रैक उपलब्ध करा देंगे।
उन्होंने आगे कहा कि पीक सीजन के दौरान बार-बार बिजली कटौती ने संकट को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है, जिससे 'मंडी' का काम-काज बाधित हो रहा है और मजदूरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और चेतावनी दी कि इतिहास उस सरकार को कभी माफ़ नहीं करेगा, जो किसानों को उनकी ज़रूरत के समय अकेला छोड़ देती है।
--आईएएनएस
पीएसके

