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'मुक्के मारे, लात मारी और हमला किया', कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबलों ने सुनाई आपबीती

'मुक्के मारे, लात मारी और हमला किया', कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबलों ने सुनाई आपबीती
'मुक्के मारे, लात मारी और हमला किया', कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबलों ने सुनाई आपबीती

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मियों ने बेकाबू भीड़ को संभालने की कोशिश के दौरान झेली गई मुश्किलों के बारे में बताया, जिन पर आरोप है कि राजधानी में एक दिन पहले इंडिया ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हमला किया था।

दिल्ली पुलिस के कुछ कॉन्स्टेबलों (जिनमें महिला कर्मी भी शामिल थीं) ने आईएएनएस से ​​बात की और उस शारीरिक हमले के बारे में बताया जो उन पर तब हुआ जब इंडिया ब्लॉक चुनाव आयोग के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि ड्यूटी के दौरान भीड़ ने उन्हें लात मारी और मुक्के मारे।

दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल दीपेंद्र संधू ने बताया कि बुधवार को बेकाबू प्रदर्शनकारियों को काबू करने की कोशिश के दौरान उन पर हमला किया गया।

संधू ने याद करते हुए बताया कि उन्होंने (प्रदर्शनकारियों ने) जान-बूझकर हमें निशाना बनाया, क्योंकि हम सबको बता रहे थे कि इलाके में धारा 163 लागू है और वे यहां प्रदर्शन नहीं कर सकते। अचानक, वे हमारे पीछे आए और हमें पीछे से खींच लिया। फिर उन्होंने हमें जमीन पर गिरा दिया और लात-घूंसे मारने लगे। किसी तरह हम खुद को बचाकर वहां से भागने में कामयाब रहे।"

कांस्टेबल ने आईएएनएस को यह भी बताया कि पीछे से हमला करने के बाद उन्होंने हमलावर को प्रदर्शन वाली जगह से भागते हुए देखा। उन्होंने कहा, "जिस आदमी ने मुझे पीछे से खींचा और लात मारी, उसने सफेद कपड़े पहने हुए थे।"

हेड कांस्टेबल भूपेंद्र अहलावत की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी। पुलिस की वर्दी में होने के बावजूद उन पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला किया। उन्होंने इसे एक सुनियोजित हमला बताया, क्योंकि प्रदर्शन कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं ने हमलावर को 'बचाव और भागने का रास्ता' दिया था।

उन्होंने कहा, "मुझे ही लात मारी गई थी। उन्होंने जान-बूझकर पीछे से मेरी कमर पकड़कर मुझे गिरा दिया। जब मैंने मुड़कर देखा कि वह कौन है और क्या मैं उसे पहचानती हूं या नहीं, तो जैसे ही मेरी नजर उससे मिली, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उसे छिपा दिया। वे उसे गोलचक्कर के बीच बने हरे-भरे इलाके में ले गए और उससे बात करके व उसे छिपाकर जान-बूझकर वहां से भेज दिया।"

सीमा नाम की एक महिला कॉन्स्टेबल ने बताया कि मंगलवार को इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा, "अपने अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना हमारा कर्तव्य है। उस समय हम इस बात पर ध्यान नहीं देते कि हमें चोट लग रही है या नहीं। मुझे बाद में पता चला कि मुझे चोट लगी है। यह घटना आकाशवाणी भवन के पास हुई, जब हम विधायकों को हिरासत में ले रहे थे।"

उन्होंने आगे कहा, "ये वही विधायक थे जो प्रियंका गांधी के साथ बैठे थे।"

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने विपक्षी कार्यकर्ताओं द्वारा अपने कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में कई एफआईआर दर्ज की हैं। यह घटना तब हुई जब पुलिसकर्मी मुश्किल हालात में भी सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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