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अभिषेक बनर्जी की कथित संपत्ति की जांच से टीएमसी नेतृत्व के सामने खड़ी हुई राजनीतिक और संगठनात्मक परीक्षा

नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की एक जांच, जो कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार या उनकी कंपनी के स्वामित्व वाली संपत्तियों से जुड़ी है, इसने पार्टी के लिए एक राजनीतिक और संगठनात्मक परीक्षा खड़ी कर दी है।
अभिषेक बनर्जी की कथित संपत्ति की जांच से टीएमसी नेतृत्व के सामने खड़ी हुई राजनीतिक और संगठनात्मक परीक्षा

नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की एक जांच, जो कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार या उनकी कंपनी के स्वामित्व वाली संपत्तियों से जुड़ी है, इसने पार्टी के लिए एक राजनीतिक और संगठनात्मक परीक्षा खड़ी कर दी है।

खबरों के मुताबिक ये नोटिस कोलकाता नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत जारी किए गए थे, जिसके तहत अधिकारियों ने कोलकाता में शांति निकेतन सहित कई जगहों का दौरा भी किया है।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि उस संपत्ति पर चिपकाया गया एक नोटिस बाद में फटा हुआ मिला, यह घटना राजनीतिक खींचतान का एक छोटा, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

यहां तक ​​कि जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार सत्ता में थी, तब भी आलोचक यह आरोप लगाते रहे हैं कि बड़ी संख्या में संपत्तियां युवा नेता अभिषेक बनर्जी और उनकी बताई जाने वाली कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स के नाम पर पंजीकृत हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने बार-बार ऐसे आरोपों को 'कीचड़ उछालने' की कोशिश बताकर खारिज किया है।

रिपोर्टों के अनुसार केएमसी के अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कुछ संपत्तियों के संबंध में नोटिस जारी किए हैं, जिनमें स्वीकृत भवन योजनाओं और संबंधित दस्तावेजों की मांग की गई है।

इसका उद्देश्य यह जांचना है कि क्या निर्माण कार्य स्वीकृत योजनाओं के अनुरूप हैं और क्या कोई कर बकाया है।

तृणमूल कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने दावा किया कि इस घटना ने संगठन के भीतर कुछ नेताओं को 'उत्तराधिकारी' (अभिषेक बनर्जी) से अपनी शर्तों पर बात करने का मौका दिया।

यह मुद्दा हाल ही में हुई एक बैठक में अप्रत्यक्ष रूप से उठाया गया। एक नेता जिन्हें कभी अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता था, उसने कथित तौर पर कहा कि कुछ ऐसे विषय हैं, जिन पर विस्तार से चर्चा करने की आवश्यकता है।

वरिष्ठ तृणमूल नेता सार्वजनिक रूप से इस घटनाक्रम से खुद को अलग करते दिखे, क्योंकि अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव होने के साथ-साथ इसके सबसे प्रमुख चेहरे में से एक हैं।

केएमसी स्वयं तृणमूल द्वारा संचालित एक नागरिक निकाय है, इसलिए पार्टी आसानी से यह दावा नहीं कर सकती कि यह कार्रवाई पूरी तरह से बाहरी उत्पीड़न का मामला है।

महापौर फिरहाद हकीम जो चार बार के तृणमूल विधायक और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली पश्चिम बंगाल कैबिनेट में पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने खुद को उस घटनाक्रम से अलग कर लिया है।

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन्हें केएमसी द्वारा ऐसी संपत्तियों के खिलाफ जांच शुरू किए जाने की कोई जानकारी थी।

इस बीच, गुरुवार देर शाम फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक संदेश में, तृणमूल के प्रवक्ता कुणाल घोष ने इन आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे अभिषेक बनर्जी की घोषित संपत्ति और डायमंड हार्बर से तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके इस उम्मीदवार की उन संपत्तियों की जांच करें, जिनका जिक्र उन्होंने अपने नामांकन पत्रों के साथ जमा किए गए हलफनामे में किया है।

2024 में, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव ने 2.32 करोड़ रुपए से ज्यादा की कुल संपत्ति घोषित की थी, जबकि उन पर लगभग 36 लाख रुपए का कर्ज था। 2022-2023 में उनकी निजी आय 82.58 लाख रुपए थी, जो पिछले वित्तीय वर्षों में घोषित 90.5 लाख रुपए से ज्यादा और 1.51 करोड़ रुपए की आय के मुकाबले काफी कम थी।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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