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'रावलकोट शहीदों' को याद कर रहा पीओके, हुकूमत से अवाम बेहद नाराज

'रावलकोट शहीदों' को याद कर रहा पीओके, हुकूमत से अवाम बेहद नाराज
'रावलकोट शहीदों' को याद कर रहा पीओके,  हुकूमत से अवाम बेहद नाराज

इस्लामाबाद, 17 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का रावलकोट पिछले कुछ महीनों से काफी चर्चा में रहा। अपने हक की बात कर रहे निहत्थों पर पाकिस्तानी सेना ने बर्बरता की हद पार कर दी। हिंसा में कई मासूमों ने जान गंवा दी। इन शहीदों को अवाम शिद्दत से याद कर रही है। स्मारकों पर लाल गुलाब रखे गए हैं और उनके सम्मान में दुकानें बंद रखी गई हैं।

ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) उस शहर पहुंचा जहां पाकिस्तानी सेना ने मासूमों पर कहर बरपाया था और ये महीनों तक विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बनकर उभरा था। स्थानीय हाजी हसन अजीजी ने बताया कि लगभग तीन हफ्ते पहले उन्होंने बड़ी बंदूकों के साथ सुरक्षा कर्मियों को 'निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाते' देखा था।"

हसन ने एबीसी को बताया, "हमने शव उठाए; उन्हें एम्बुलेंस में रखा और कुछ को अपने कंधों पर उठाया। यह वह जगह (इशारे से दिखाते हुए) है जहां एक लड़का शहीद हुआ था। उसका नाम नोमान था। वह यहां से दो से तीन किलोमीटर दूर सिंगोला गांव का रहने वाला था।"

एबीसी की रिपोर्ट में आगे कहा गया, "शहर के एक और शख्स मुमताज खान ने कहा कि उसने पुलिस को आंसू गैस छोड़ते देखा, और फिर इतनी गोलियां चलीं कि उनके घर की दीवारों में छेद हो गए।"

ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने पब्लिक सर्विस मीडिया संस्थान ने आगे बताया कि, गोलीबारी के बाद से, शहर का केंद्रीय बस अड्डा सैकड़ों प्रदर्शनकारियों से पटा पड़ा है। ये बदलाव की मांग कर रहे हैं आक्रोशित हैं। रिपोर्ट में बताया गया, "कई लोगों ने एबीसी को बताया कि वे इस बात से हैरान हैं कि सरकार की जवाबी कार्रवाई इतनी क्रूर कैसे हो सकती थी।" लोगों ने कहा कि विदेशी मीडिया की ओर से रखे गए स्थानीय जर्नलिस्ट (जिन्हें अक्सर "फिक्सर" कहा जाता है) को भी इंटरनेट और मोबाइल कवरेज शटडाउन के बीच जानकारी इकट्ठा करने से रोक दिया गया।

स्थानीय लोगों ने ऑस्ट्रेलियन नेटवर्क को बताया कि कई घायलों को इलाज के लिए उनके घर ले जाया गया क्योंकि अस्पताल बंद हो गए थे।

हसन ने एबीसी को बताया, "जो भी इलाज कर सकते थे, हमने वो किया... हमने उनके जख्मों को अपने स्कार्फ से ढक दिया। हमें सिर्फ ये लगा कि वे आंसू गैस का इस्तेमाल करेंगे। हमारे हाथों में डंडे और पत्थर थे।"

उन्होंने आगे कहा कि लोग अब खाने-पीने का सामान तक खरीदने में संघर्ष कर रहे हैं, प्रशासन इस इलाके में डिलीवरी पहुंचने नहीं दे रही, और सरकार ने कुछ इलाकों की बिजली तक काट दी।

पिछले हफ्ते, विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और मीडिया से पीओके की स्थिति पर नजर रखने की अपील की।

जेएएसी द्वारा एक्स पर शेयर किए गए वीडियो में एक कमरे में कई लोग जमा देखे जा सकते हैं, जबकि एक आदमी का इलाज चल रहा था। वीडियो में, आदमी ने कहा कि पीओके में लोगों पर सिक्योरिटी फोर्स की फायरिंग में एक व्यक्ति घायल हो गया और उसने प्रदर्शन जारी रखने की कसम खाई।

एक्स पर वीडियो साझा करते हुए, जेएएसी ने कहा, "रावलकोट में सुरक्षा बलों की फायरिंग में दो लोग घायल हो गए। आम लोगों के खिलाफ बल का इस्तेमाल बहुत चिंताजनक है। हम हिंसा को तुरंत खत्म करने की मांग करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मीडिया से जमीनी हालात पर करीब से नजर रखने की अपील करते हैं।"

जेएएसी का यह बयान गुरुवार को पीओके में हुई अलग-अलग रैलियों में हजारों लोगों के इकट्ठा होने के कुछ घंटों बाद आया। स्थानीय लोगों ने पिछले कई महीनों से पाकिस्तानी फोर्स द्वारा की जा रही क्रूर हिंसा की आलोचना की।

बोखारा में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने झंडे लेकर एक प्रदर्शन रैली में "इंकलाब आएगा" (क्रांति होगी) जैसे नारे लगाए।

पाकिस्तानी सरकार ने पाबंदियां इस कदर लगा रखी हैं कि मृतकों की संख्या का सही अनुमान नहीं लग पा रहा है। इस बीच कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि पीओके हिंसा के दौरान 100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।

स्थानीय लोगों और पाकिस्तानी सरकार के बीच ये बड़ा टकराव बिजली और जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों को लेकर शुरू हुआ था। बाद में यह राजनीतिक सुधारों, ज्यादा जवाबदेही और प्रतिनिधि सरकार की मांग करने वाले आंदोलन में बदल गया।

--आईएएनएस

केआर/

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