पीओके में प्रदर्शनकारियों की मौतों के बाद तनाव बढ़ा, जेएसीसी ने 23 जुलाई को बताया निर्णायक दिन
इस्लामाबाद, 21 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने मंगलवार को कहा कि स्वैच्छिक बंद और चक्का जाम हड़ताल जारी है। संगठन ने 23 जुलाई को बेहद महत्वपूर्ण दिन बताते हुए लोगों से बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की है।
जेएएसी ने लोगों से अपनी मांगों के कार्यान्वयन की मांग को लेकर पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन में शामिल होने और आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया। संगठन ने अधिकारियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग उन लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं, जिन्हें अपने अधिकारों की मांग करने पर मारा गया।
जेएएसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "45 दिनों से जारी उत्पीड़न और क्रूरता, बड़े पैमाने पर हत्याओं और शासकों द्वारा बुनियादी मानवाधिकारों के उल्लंघन के बावजूद हम कश्मीर के लोगों की दृढ़ता को सलाम करते हैं। शासक उन लोगों के हत्यारे हैं, जिन्हें अपने अधिकारों की मांग करने के बदले में मार दिया गया। दर्जनों लोगों की हत्या की गई, लेकिन शासकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। इसका कारण उनकी सत्ता की लालसा है। हम अपने शहीदों के खून से कोई समझौता किए बिना शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे इन चालाक और धोखेबाज शासकों के झूठे वादों में न आएं।"
जेएएसी ने मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजन के लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करते हुए एक्स पर लिखा, "मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजन के लोग 23 जुलाई को पूरी ताकत के साथ विरोध प्रदर्शन करें। 23 जुलाई को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने और बंदूक की नोक पर फर्जी चुनावों के जरिए धोखेबाज, चालाक और पाखंडी लोगों को जनता पर थोपने के संबंध में एक महत्वपूर्ण घोषणा की जाएगी।"
एक अन्य पोस्ट में जेएएसी ने बताया कि रावलकोट निवासी जिब्रान मुश्ताक फराम तारार, जिनका इस्लामाबाद में इलाज चल रहा था, उनकी मौत हो गई। संगठन के अनुसार, सुरक्षा बलों की गोली लगने से उसकी मौत हुई।
इससे पहले पिछले सप्ताह पीओके में जारी अशांति में 30 से अधिक लोगों की मौत के बाद जेएएसी ने अपनी प्रस्तावित लंबी मार्च यात्रा को 21 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया था। संगठन ने पाकिस्तान सरकार को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए अंतिम अवसर दिया था।
14 जुलाई की समय सीमा खत्म होने के बाद जेएएसी ने मुजफ्फराबाद की ओर मार्च के लिए हजारों समर्थकों को जुटाया था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए थे। पूरे क्षेत्र से आए काफिले रावलाकोट और अन्य प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचे थे।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद मार्च को स्थगित कर दिया गया। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मुजफ्फराबाद की ओर लंबा मार्च दोबारा शुरू किया जाएगा। वहीं, पीओके के विभिन्न हिस्सों में धरना प्रदर्शन जारी रहेंगे।
17 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने पीओके में बढ़ती अशांति के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकारों के उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई। हालिया हिंसा में दर्जनों लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की खबर है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने बयान में कहा, "किसी नागरिक समाज संगठन को अपराधी घोषित करना और सार्वजनिक सभाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। हिरासत में लिए गए जेएएसी नेताओं को कानूनी सहायता और अपने परिवारों से संपर्क का अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही, उनके उचित कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए।"
बयान के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसा में हुई सभी मौतों की त्वरित, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने का भी आग्रह किया।
प्रवक्ता ने कहा कि पीओके में 27 जुलाई को होने वाले चुनाव से पहले बढ़े तनाव के कारण जून से अब तक कथित तौर पर कानून प्रवर्तन कर्मियों सहित दर्जनों नागरिक मारे गए हैं।
विरोध पर पाकिस्तानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर गहरी चिंता जताते हुए, यूएन मानवाधिकार ऑफिस ने कहा, “जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) विरोध के पीछे का एक मूवमेंट है। इसमें ट्रेडर्स, ट्रांसपोर्टर्स, स्टूडेंट्स, वकील, एक्टिविस्ट्स और दूसरे लोग शामिल हैं। इन पर पब्लिक ऑर्डर और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने का आरोप है और इन्हें एंटी-टेररिज्म कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया। ग्रुप के कुछ नेताओं को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया है।”
--आईएएनएस
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