प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी होगी ज्यादा मजबूत
नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। इससे साफ दिखता है कि भारत, यूएई के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करने को कितनी अहमियत दे रहा है।
यूएई के अखबार खलीज टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरे में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री स्थिरता और व्यापार को सुरक्षित रखने जैसे मुद्दों पर खास फोकस रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से उच्च स्तरीय बातचीत करेंगे। दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस यात्रा का समय भी काफी अहम माना जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र इस वक्त कई तरह की भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है, समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर खतरे बढ़ रहे हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे समय तक रुकावट आने की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस यात्रा के दौरान भारत की कोशिश रहेगी कि क्षेत्रीय तनाव का असर उसकी अर्थव्यवस्था और व्यापारिक रास्तों पर कम से कम पड़े। इसी वजह से भरोसेमंद ऊर्जा सप्लाई और रक्षा सहयोग बातचीत के मुख्य मुद्दे रह सकते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में लंबी अवधि के एलएनजी समझौते, कच्चे तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना, तेल और गैस परियोजनाओं में निवेश और सप्लाई में रुकावट से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
यूएई पहले से ही भारत के बड़े ऊर्जा साझेदारों में शामिल है। वह भारत को कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी सप्लाई करता है। साथ ही भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और तेल-गैस परियोजनाओं में भी यूएई का निवेश है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के रक्षा संबंध भी अब नए दौर में पहुंच रहे हैं। भारत और यूएई इस साल पहले साइन किए गए लेटर ऑफ इंटेंट के बाद अब एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी समझौते को आगे बढ़ा सकते हैं।
इस प्रस्तावित समझौते में रक्षा निर्माण, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करना, आतंकवाद विरोधी सहयोग और विशेष सैन्य अभियानों जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
यूएई की भौगोलिक स्थिति भी भारत के लिए काफी अहम मानी जाती है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापारिक समुद्री रास्तों के करीब स्थित है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में प्रभाव बढ़ाने की होड़ तेज हो रही है, यूएई भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है।
पिछले दस वर्षों में भारत और यूएई के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया है। पहले यह रिश्ता मुख्य रूप से तेल और प्रवासी भारतीयों से आने वाले पैसों तक सीमित था, लेकिन अब यह रक्षा, फिनटेक, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल पेमेंट जैसे कई क्षेत्रों तक फैल चुका है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आज यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत में विदेशी निवेश करने वाले बड़े देशों में भी शामिल है।
रिपोर्ट में भारतीय समुदाय की अहम भूमिका का भी जिक्र किया गया है। यूएई में 45 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं, जो विदेश में रहने वाला भारत का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। उनकी कमाई, कारोबार और पेशेवर योगदान दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान प्रवासी भारतीयों की भलाई, श्रमिकों के अधिकार और आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब यूएई खुद को दुनिया के बड़े टैलेंट और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
--आईएएनएस
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