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सोमनाथ मंदिर के शिखर पर पहली बार होगा 'कुंभाभिषेक', प्रधानमंत्री मोदी होंगे शामिल

गिर सोमनाथ, 11 मई (आईएएनएस)। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर के भव्य शिखर का देश के 11 पवित्र तीर्थों के जल से कुंभाभिषेक किया जाएगा। इस कुंभाभिषेक के लिए एक विशेष कलश का इस्तेमाल होगा। इस समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।
सोमनाथ मंदिर के शिखर पर पहली बार होगा 'कुंभाभिषेक', प्रधानमंत्री मोदी होंगे शामिल

गिर सोमनाथ, 11 मई (आईएएनएस)। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर के भव्य शिखर का देश के 11 पवित्र तीर्थों के जल से कुंभाभिषेक किया जाएगा। इस कुंभाभिषेक के लिए एक विशेष कलश का इस्तेमाल होगा। इस समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।

समारोह के दौरान 11 तीर्थ स्थलों का पवित्र जल मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर चढ़ाया जाएगा। यह आयोजन मंदिर के पुनर्निर्माण और पुनः प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित 'सोमनाथ अमृत पर्व-2026' का हिस्सा है।

यह समारोह 8 से 11 मई तक आयोजित किया जाएगा। चार दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में आजादी के बाद पहले ज्योतिर्लिंग मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है।

सोमनाथ मंदिर को सनातन विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। इसका पुनर्निर्माण भारत के पहले उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रस्ताव के बाद कराया गया था।

आयोजकों के अनुसार, पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के शिखर पर पहली बार कुंभाभिषेक किया जाएगा। यह रस्म आमतौर पर दक्षिण भारत के मंदिरों से जुड़ी मानी जाती है और पारंपरिक रूप से हर 10 से 12 वर्ष में शुद्धिकरण समारोह के रूप में आयोजित की जाती है।

इस अनुष्ठान के लिए 1,100 लीटर क्षमता वाला विशेष रूप से डिजाइन किया गया कलश तैयार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कलश का वजन 760 किलोग्राम है और पानी से भरने के बाद इसका कुल वजन लगभग 1.86 मीट्रिक टन हो जाएगा।

यह कलश आठ फीट ऊंचा है और इसमें 11 तीर्थ स्थलों से लाया गया पवित्र जल रखा जाएगा।

कलश को मंदिर परिसर के बाहर खड़ी 350 टन क्षमता वाली ऑल-टेरेन क्रेन की मदद से मंदिर के शिखर तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि क्रेन के बूम को शिखर की 90 मीटर ऊंचाई तक पहुंचने के लिए विशेष रूप से बढ़ाया गया है।

तैयारियों में शामिल अधिकारियों के अनुसार, पूरी व्यवस्था ‘जीरो लोड प्रिंसिपल’ के तहत तैयार की गई है, ताकि मंदिर पर कोई अतिरिक्त संरचनात्मक भार न पड़े और समारोह के दौरान यह धरोहर संरचना पूरी तरह सुरक्षित रहे।

रोड्स एंड बिल्डिंग्स डिपार्टमेंट ने रिचुअल इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी और इंस्टॉलेशन के काम की देखरेख की।

कलश में मौजूद पानी को रिमोट से चलने वाले सेंसर मैकेनिज्म के जरिए मंदिर के शिखर पर छोड़ा जाएगा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तीन मिनट में अभिषेक पूरा होने की उम्मीद है।

इस बड़े धार्मिक आयोजन के तहत 51 ब्राह्मण अतिरुद्र पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार कर रहे हैं, जबकि 1.25 लाख आहुतियों वाला तीन दिवसीय महारुद्र यज्ञ भी आयोजित किया गया है।

समारोह में भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम का छह हॉक एमके-132 एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करके एक खास एरियल डिस्प्ले भी शामिल है।

--आईएएनएस

केके/एएस

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