प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से किया संवाद, मांगा आशीर्वाद
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन किया और स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने 1993 में आध्यात्मिक गुरु के साथ हुई अपनी मुलाकात को भी याद किया।
होलोग्राफिक संवाद के दौरान, पीएम मोदी ने अपने भविष्य के कार्यों के लिए आध्यात्मिक गुरु का आशीर्वाद मांगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "मेरा सौभाग्य था कि मैं आपसे मिला था, और आज मैं चाहता हूं कि आप मुझे उन कार्यों के लिए आशीर्वाद दें, जिन्हें मैं पूरा करना चाहता हूं।"
पीएम मोदी की बात का जवाब देते हुए, स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखकर खुशी जताई और अपना समर्थन देते हुए कहा, "भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र।" वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने इस अवसर को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव बताया और संतों के आशीर्वाद के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, "यह एक अलग तरह का आध्यात्मिक अनुभव है। यह हमारे संतों का मेरे लिए आशीर्वाद है। चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है; यह 'चिन्मय विचार' का प्रतिनिधित्व करता है।" इस अवसर के महत्व को समझाते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि 'चिन्मय' शब्द अमरता का प्रतीक है, जो भारत मंडपम में आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन' को और भी अर्थपूर्ण बनाता है।
पीएम मोदी ने कहा, "एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे मैं उसी समय में वापस चला गया हूं। मेरे लिए यह एक भावुक पल है।" उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए चिन्मय मिशन को धन्यवाद दिया। आध्यात्मिक गुरु के साथ अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वे उनसे फरवरी या मार्च 1993 के आसपास मिले थे, ताकि उन्हें शिकागो में होने वाले 'विश्व धर्म संसद' (वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन्स) के शताब्दी समारोह में आमंत्रित कर सकें।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "उन्होंने मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिया और 'विश्व धर्म संसद' के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए वहां जाने को तैयार हो गए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कार्यक्रम से कुछ हफ्ते पहले ही, 3 अगस्त को वे हमें छोड़कर चले गए।"
वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज हम देख रहे हैं कि चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों और युवाओं का भविष्य निर्माण कर रहे हैं। बच्चों को उन संस्थानों में आधुनिक शिक्षा भी मिल रही है और वे भारतीय संस्कारों को भी आत्मसात कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "आजादी के समय स्वामी चिन्मयानंद जैसे दूरदर्शी लोगों का जो चिंतन था, आज देश भी उस दिशा में अपने दायित्वों को निभा रहा है। हमारी शिक्षा व्यवस्था नए भारत के हिसाब से हो, इसके लिए हम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आए हैं। इस नई एजुकेशन पॉलिसी में (भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और नई तकनीक) को महत्व दिया गया है। स्वामी जी के जीवन का एक और मिशन 'भारतीय विरासत पर गर्व' और उसका संरक्षण था। आप सभी कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल से परिचित हैं। समुद्र के बीच उस विशाल शिला पर एक स्मारक बने, यह संकल्प एकनाथ रानडे ने लिया था।"
पीएम ने कहा, "तब गुरुदेव उनके साथ मजबूती से खड़े थे। इस महान कार्य के लिए पहला आर्थिक योगदान भी स्वामी जी ने ही दिया था। आज विवेकानंद रॉक मेमोरियल देश और दुनिया के आने वाले लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र है। आज भारत में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक सांस्कृतिक केंद्रों का पुनर्जागरण हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम का नया स्वरूप हो, अयोध्या में प्रभु श्रीराम का प्रसिद्ध मंदिर हो, उज्जैन का महाकाल लोक हो या केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे हमारे धाम हों, आज ये सभी अपने भव्य स्वरूप में वापस लौट रहे हैं। सभी को पता है कि एक वक्त भारत से कितनी ही मूर्तियां चोरी करके विदेश ले जाई गईं। वहां बेच दी गईं। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं था।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "बीते 12 वर्षों में हम ऐसी 650 से ज्यादा चोरी की गईं प्राचीन मूर्तियां भी वापस लेकर आए हैं। हमारे सांस्कृतिक केंद्र यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का हिस्सा बन रहे हैं, जिस तरह से स्वामी जी हमारे धर्म और दर्शन को दुनिया के लोगों तक लेकर गए थे। उसी तरह से आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विश्व के लोगों को भारत से जोड़ रहा है, अपनी पुरातन महान परंपरा से जोड़ रहा है। अपनी विरासत पर गर्व का ये आत्मविश्वास गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का भरोसा, इस बात का प्रमाण है कि देश अब उस राह पर आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना हमारे ऋषियों और राष्ट्रभक्तों ने सदियों से देखा था। उनकी विचारशक्ति इस राह में हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
--आईएएनएस
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