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पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत याचिका पर गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें असम पुलिस की ओर से दर्ज एक आपराधिक मामले के संबंध में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत याचिका पर गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें असम पुलिस की ओर से दर्ज एक आपराधिक मामले के संबंध में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

यह मामला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणियों से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, खेड़ा ने रविवार को एक स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर की है, और इस मामले को डायरी नंबर 25523/2026 के तौर पर रजिस्टर किया गया है। शाम करीब 6.26 बजे दायर की गई यह याचिका फिलहाल 'पेंडिंग' के तौर पर लिस्टेड है।

यह याचिका गुवाहाटी हाईकोर्ट की ओर से खेड़ा को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इनकार करने के दो दिन बाद आई है। जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की सिंगल-जज बेंच ने फैसला सुनाया था कि कांग्रेस नेता 'गिरफ्तारी से पहले जमानत का विशेषाधिकार पाने के हकदार नहीं हैं।'

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इस मामले को सिर्फ मानहानि का मामला नहीं कहा जा सकता। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 339 के तहत पहली नजर में मामला बनने के सबूत मौजूद हैं।

कांग्रेस ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि गुवाहाटी हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि पार्टी खेड़ा के साथ 'पूरी मजबूती से खड़ी है' और उन्हें भरोसा है कि उन्हें राहत जरूर मिलेगी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि अपने मीडिया और प्रचार विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा के साथ पूरी पार्टी मजबूती से खड़ी है। गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया चल रही है। हमें पूरा भरोसा है कि धमकी, डराने-धमकाने और परेशान करने की राजनीति पर न्याय की जीत होगी।

इससे पहले, खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी, जिसने उन्हें सीमित समय के लिए ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल (गिरफ्तारी से पहले जमानत) दी थी, जिससे वह असम में संबंधित कोर्ट में जाकर नियमित राहत की मांग कर सकें।

हालांकि, असम पुलिस की ओर से इस आदेश को चुनौती दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस राहत पर रोक लगा दी थी। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की रोक हटाने की याचिका को खारिज कर दिया और अंतरिम सुरक्षा की अवधि बढ़ाने से भी इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया कि उसके पिछले आदेशों में की गई किसी भी टिप्पणी का असर असम की संबंधित कोर्ट की ओर से जमानत याचिका पर फैसला सुनाते समय नहीं पड़ना चाहिए।

--आईएएनएस

एसडी/एबीएम

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