तिरुपति में हाथियों के झुंड पर ड्रोन से होगी निगरानी, पवन कल्याण ने अधिकारियों को दिए निर्देश
अमरावती, 16 अगस्त (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री पवन कल्याण ने रविवार को वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तिरुपति जिले के चंद्रगिरि के पास एर्रावरिपालेम क्षेत्र में घूम रहे हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग करें।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे ड्रोन का इस्तेमाल करके हाथियों के रास्तों का पता लगाएं और आसपास के गांवों के निवासियों को जानकारी देते रहें।
उपमुख्यमंत्री और वन एवं पर्यावरण मंत्री पवन कल्याण ने रविवार को वन विभाग के अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंसिंग की। यह बातचीत उन रिपोर्टों के बारे में थी जिनमें कहा गया था कि शेषाचलम वन क्षेत्र से आए हाथी दो झुंडों में घूम रहे हैं और रात में जंगल के किनारे खेतों में फसलें बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने वन, राजस्व और पुलिस विभागों को जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए मिलकर काम करने का निर्देश दिया।
पवन कल्याण ने जंगल से सटे गांवों में रात में विशेष गश्त की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। उन्होंने संवेदनशील इलाकों में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया ताकि उन्हें रात में खेतों में जाने से रोका जा सके और जरूरी सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकें।
हाथियों से होने वाले जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए पहले से ही जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए। यह निर्देश दिया गया कि गांवों में लाउडस्पीकर, मोबाइल संदेश और स्थानीय सूचना प्रणालियों के जरिए चेतावनी दी जाए।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए और जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहां भी जरूरी हो, 'हनुमान' टीमों को तैनात करना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जमीनी स्तर के कर्मचारी चौबीसों घंटे सतर्क रहें।
पवन कल्याण ने जनता से सतर्क रहने और वन विभाग के अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जैसे ही अधिकारी फसल के नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर लेंगे, वन विभाग के जरिए तुरंत मुआवजा दिया जाएगा।
पवन कल्याण ने 13 अगस्त को कहा था कि तबाही मचाने वाले जंगली हाथियों को रोकने के लिए 'कुम्की' हाथियों को तैनात करने से जंगल से सटे इलाकों में इंसानों की मौत के मामलों में 70 प्रतिशत की कमी आई है।
दरअसल 'कुम्की' हाथी प्रशिक्षित पालतू हाथी होते हैं। वन विभाग इनका इस्तेमाल जंगली हाथियों को नियंत्रित करने, उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर भगाने और बचाव अभियानों में करता है।
विश्व हाथी दिवस के राष्ट्रीय स्तर के समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हाथी-इंसान संघर्ष प्रबंधन से फसलों के नुकसान में भी कमी आई है।
उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार की मदद से चार 'कुम्की' हाथी लाए गए और उन्हें इंसान-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में मदद के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने कहा कि इन उपायों के एजेंसी क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
--आईएएनएस
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