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गोदावरी प्रदूषण मामले में आंध्र पेपर मिल्स को समन जारी करने के निर्देश, पवन कल्याण ने सख्त कार्रवाई के दिए आदेश

गोदावरी प्रदूषण मामले में आंध्र पेपर मिल्स को समन जारी करने के निर्देश, पवन कल्याण ने सख्त कार्रवाई के दिए आदेश
गोदावरी प्रदूषण मामले में आंध्र पेपर मिल्स को समन जारी करने के निर्देश, पवन कल्याण ने सख्त कार्रवाई के दिए आदेश

अमरावती, 4 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्री पवन कल्याण ने शुक्रवार को राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी) में गोदावरी नदी के प्रदूषण के लिए आंध्र पेपर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को कंपनी के खिलाफ समन जारी करने और नियमों के तहत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

पवन कल्याण ने अधिकारियों से कहा कि कंपनी के खिलाफ पर्यावरण नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने महाधिवक्ता, अतिरिक्त महाधिवक्ता, सरकारी वकीलों और स्टैंडिंग काउंसिल को भी कंपनी से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।

शुक्रवार को जारी बयान में उपमुख्यमंत्री ने कंपनी पर पिछले 10 वर्षों से कर भुगतान से बचने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार कंपनी पर स्थानीय निकायों का 21.34 करोड़ रुपये बकाया है और उसने वर्ष 2016 से कोई कर नहीं चुकाया है।

पवन कल्याण ने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राजमहेंद्रवरम शहर में होने वाले कुल जल प्रदूषण का लगभग आधा हिस्सा अकेले आंध्र पेपर मिल्स से आता है। उन्होंने बताया कि शहर से प्रतिदिन करीब 70 मिलियन लीटर तरल अपशिष्ट निकलता है, जिसमें से 35 मिलियन लीटर अपशिष्ट अकेले यह कंपनी छोड़ती है।

उन्होंने कहा कि जांच में यह भी पुष्टि हुई है कि कंपनी द्वारा छोड़े जा रहे अपशिष्ट में प्रदूषक तत्व निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए हैं। अपशिष्ट लैगून के पास लिए गए नमूनों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 36 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई, जो निर्धारित मानक से 20 प्रतिशत अधिक है। फॉस्फेट का स्तर 5.3 मिलीग्राम और सल्फाइड का स्तर 3.4 मिलीग्राम पाया गया, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों से क्रमशः 6 प्रतिशत और 70 प्रतिशत अधिक है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रदूषण से नदी में ऑक्सीजन का स्तर घटता है, जिससे जलीय जीवों का जीवन खतरे में पड़ता है और गोदावरी का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है। इससे दुर्गंध फैलती है, पानी की गुणवत्ता खराब होती है, लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है।

पवन कल्याण ने याद दिलाया कि अपने क्षेत्रीय दौरे के दौरान उन्होंने कंपनी को भूजल प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी थी, लेकिन कंपनी ने उस पर अमल नहीं किया।

उन्होंने कहा कि इन उल्लंघनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के तहत उद्योग का संचालन रोकने, जुर्माना लगाने, कंपनी की संपत्ति जब्त करने या लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती थी। हालांकि, उद्योगों को अनावश्यक कठिनाई से बचाने के उद्देश्य से गठबंधन सरकार ने पहले चेतावनी स्वरूप कारण बताओ नोटिस जारी कर सुधार का अवसर दिया था।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन महीनों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कंपनी प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें कीं और सुधारात्मक उपाय सुझाए, लेकिन कंपनी की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

उन्होंने कहा, "मैं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश देता हूं कि आंध्र पेपर्स लिमिटेड को तत्काल समन जारी करें और नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई करें।"

पवन कल्याण ने "स्वच्छ गोदावरी-पवित्र पुष्करालु" अभियान के तहत गोदावरी नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पर्यावरणविदों और नागरिक समाज से सरकार का सहयोग करने की अपील भी की।

--आईएएनएस

डीएससी

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