पाकिस्तान : नौकरी में आरक्षण लागू न होने से बढ़ी बेरोजगारी और भेदभाव से ट्रांसजेंडर समुदाय परेशान
इस्लामाबाद, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के फैसलाबाद में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने भेदभाव और 'ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अधिनियम 2018' के सही ढंग से लागू नहीं होने पर चिंता व्यक्त की है। खासकर सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों में तीन प्रतिशत नौकरी आरक्षण लागू न होने पर।
एक पुलिस सेवा केंद्र में विक्टिम सपोर्ट ऑफिसर डॉ. फरी ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को अत्यधिक योग्य होने के बावजूद स्थिर रोजगार पाने में लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, फरी ने बताया कि उनके पास फैसलाबाद के कृषि विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ वेटरिनरी मेडिसिन (डीवीएम) की डिग्री है। इसके बावजूद उन्हें अभी भी नौकरी खोजने में संघर्ष करना पड़ रहा है।
फरी ने बताया कि एक निजी डेयरी फार्म में अस्थायी रूप से काम करते समय उन्हें नियोक्ताओं और आम लोगों से मौखिक दुर्व्यवहार और असंवेदनशील टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
डॉ. फरी ने बताया कि उन्होंने आरक्षित कोटे के तहत कई सरकारी विभागों में नौकरियों के लिए आवेदन किया था। हालांकि, उन्हें किसी भी पद के लिए नहीं चुना गया।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को प्रति माह 30,000 पाकिस्तानी रुपए (पीकेआर) का वेतन मिल रहा है, जो न्यूनतम वेतन मानकों से भी कम है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में इतने कम वेतन में घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा, "इन परिस्थितियों में हम न तो अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकते हैं और न ही गरिमापूर्ण जीवन जी सकते हैं।" उन्होंने सरकार से स्थायी रोजगार और उचित वेतन प्रदान करने की अपील की।
इससे पहले जनवरी में आई एक रिपोर्ट में ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता बिंदिया राणा पर हुए हमले का जिक्र करते हुए बताया गया कि पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है।
राणा पर उनके घर पर उस समय हमला किया गया, जब वह जहरिश खानजादी के साथ चाय पी रही थीं। जहरिश भी एक ट्रांसजेंडर महिला हैं और 'जेंडर अलायंस इंटरैक्टिव' (जीआईए) नामक संगठन के लिए काम करती हैं। यह संगठन ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की वकालत करता है।
ब्रिटेन के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र 'द गार्डियन' ने खानज़ादी के हवाले से बताया, "जैसे ही राणा ने रसोई से ही रिमोट के जरिए दरवाजा खोला, उसके कुछ ही सेकंड के भीतर तीन गोलियों की आवाज गूंज उठी। हमलावर वहां से भाग निकले, और राणा बाल-बाल बच गईं।''
सुबह होते-होते, उन्होंने अनजान हमलावरों के खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी थी। एक एक्टिविस्ट होने के नाते, खानज़ादी को इस बात का पूरा अंदाजा था कि पाकिस्तान में ट्रांस कम्युनिटी को किन-किन खतरों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उन्हें कभी यह उम्मीद नहीं थी कि कराची में अपने ही घर की चारदीवारी में वह खुद ही किसी हमले का शिकार बन जाएंगी।
19 जनवरी को हुई गोलीबारी की यह घटना, पाकिस्तान में ट्रांसजेंडरों पर होने वाले क्रूर हमलों और हत्याओं की एक लंबी कड़ी में सबसे ताजा मामला है। इससे पहले नादिरा नाम की एक ट्रांस महिला कराची के 'सी व्यू' बीच पर थी। तभी एक आदमी उसके पास गलत इरादे से आया। नादिरा ने उसका विरोध किया, जिसके बाद उस आदमी ने नादिरा पर चाकू से हमला कर दिया।
'द गार्डियन' अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया, "पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के खिलाफ हिंसा में भारी बढ़ोतरी हुई है। जीआईए ने 2022 से लेकर सितंबर 2025 के बीच सिंध प्रांत में ट्रांसजेंडरों की 55 हत्याओं के मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 17 हत्याएं अकेले कराची में हुई हैं।''
खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत के कई जिलों में स्थानीय बुजुर्गों ने ट्रांस महिलाओं को इलाका छोड़कर चले जाने का फरमान सुना दिया है। इन बुजुर्गों का आरोप है कि ये महिलाएं युवाओं को बिगाड़ रही हैं।
--आईएएनएस
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