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पाकिस्तान पासपोर्ट घोटाले ने सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की खोली पोल: रिपोर्ट

पाकिस्तान पासपोर्ट घोटाले ने सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की खोली पोल: रिपोर्ट
पाकिस्तान पासपोर्ट घोटाले ने सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की खोली पोल: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 5 सितंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में पासपोर्ट घोटाले ने देश की व्यवस्था की तीन बड़ी समस्याओं को उजागर कर दिया है। इनमें अफगानिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्ते, राजनीतिक रूप से प्रभावित और भ्रष्ट नागरिक संस्थान, तथा हर समस्या का दोष बाहरी लोगों पर डालने की पुरानी प्रवृत्ति शामिल है। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है।

स्ट्रिंगर एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, ''पाकिस्तान को पता चला है कि हजारों अफगान नागरिक पाकिस्तानी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे थे। इस्लामाबाद की पसंदीदा व्याख्या भी अनुमान के मुताबिक है। उसका कहना है कि अफगान नागरिकों ने देश की पहचान प्रणाली में घुसपैठ की, मेहमाननवाजी का फायदा उठाया, सुरक्षा को खतरे में डाला और विदेशों में पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचाया।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला उस कहानी से मेल खाता है, जिसे पाकिस्तान ने काबुल के साथ संबंध बिगड़ने के बाद से लगातार पेश किया है। इस कहानी में पाकिस्तान खुद को अफगान आतंकियों, अफगान शरणार्थियों और अब अफगान दस्तावेजी धोखाधड़ी से घिरा हुआ देश बताता है, लेकिन हकीकत यह है कि ये दस्तावेज खुद-ब-खुद जारी नहीं हुए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह केवल अफगानों द्वारा फर्जी दस्तावेज हासिल करने का मामला नहीं है, बल्कि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा गलत आधार पर असली दस्तावेज जारी करने का मामला है।

रिपोर्ट में कहा गया, ''अगर कोई विदेशी नागरिक किसी पाकिस्तानी परिवार के रिकॉर्ड में शामिल हो सकता है, कम्प्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र हासिल कर सकता है और फिर पासपोर्ट भी बनवा सकता है तो इसके लिए सिर्फ काबुल में बैठा कोई कुशल जालसाज जिम्मेदार नहीं हो सकता। इसके लिए पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था तक पहुंच, भ्रष्ट बिचौलियों और कुछ मामलों में अधिकारियों की मिलीभगत जरूरी है।''

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की राष्ट्रीय डाटाबेस एवं पंजीकरण प्राधिकरण के जिन कर्मचारियों पर फर्जी दस्तावेज जारी कराने में मदद करने का आरोप है, उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई चल रही है। कुछ कर्मचारियों को नौकरी से भी हटाया गया है। साथ ही पिछले महीने छापों के दौरान 100 से अधिक एजेंटों को गिरफ्तार किए जाने की भी खबर है।

जुलाई में संघीय जांच एजेंसी ने उन नादरा अधिकारियों को हिरासत में लिया था, जिन पर अफगान नागरिकों की मदद करने का संदेह था। एजेंसी ने इस नेटवर्क के आतंकी संगठनों से संभावित संबंधों की भी जांच शुरू की थी।

हालांकि, स्ट्रिंगर एशिया के अनुसार राजनीतिक बयानबाजी अब भी अफगानों को ही इस घोटाले का मुख्य कारण बताती है, जबकि पाकिस्तानी सरकारी तंत्र की भूमिका को पीछे कर दिया जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया, ''विदेशी को घुसपैठिया बताया जाता है, जबकि नागरिकता बेचने वाले अधिकारी को व्यवस्था की एक तकनीकी खामी की तरह पेश किया जाता है। यह तरीका इसलिए सुविधाजनक है क्योंकि इससे सरकारी तंत्र की विफलता को बाहरी खतरे के रूप में दिखाया जा सकता है।''

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हजारों दस्तावेजों से जुड़े इस नेटवर्क ने संभवतः केवल एक ही समूह को सेवाएं नहीं दी होंगी।

रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले को मुख्य रूप से आतंकवाद से जोड़कर पेश करने से इस्लामाबाद उस अधिक शर्मनाक संभावना से बच जाता है कि पाकिस्तानी पहचान एक ऐसी वस्तु बन चुकी है, जिसे सही दलाल के जरिए खरीदा जा सकता है।

रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया, ''सरेंडर किए गए पासपोर्ट इस बात का सबूत नहीं हैं कि पाकिस्तान की सीमाएं केवल बाहर से भेदी गईं। वे इस बात का प्रमाण हैं कि सीमा की सुरक्षा देश के भीतर से ही बेची जा रही थी।''

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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