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पाकिस्तान में तेजी से बढ़ती आबादी से बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ा : रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 10 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान की आबादी लगातार तेजी से बढ़ रही है, जिससे वहां की कई व्यवस्थाएं इसे संभाल नहीं पा रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे देश अपनी जनसंख्या की सीमा के करीब पहुंचता जा रहा है।
पाकिस्तान में तेजी से बढ़ती आबादी से बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ा : रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 10 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान की आबादी लगातार तेजी से बढ़ रही है, जिससे वहां की कई व्यवस्थाएं इसे संभाल नहीं पा रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे देश अपनी जनसंख्या की सीमा के करीब पहुंचता जा रहा है।

मालदीव इनसाइट की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के स्वास्थ्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान जल्द ही दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला देश बन सकता है। इस बात ने एक बार फिर उस बड़ी चुनौती की तरफ ध्यान खींचा है, जिस पर अक्सर उतनी गंभीरता से बात नहीं होती, जितनी होनी चाहिए।

पाकिस्तान की आबादी हर साल लगभग 6.2 मिलियन लोगों से बढ़ रही है और कुल आबादी 255 मिलियन से ज्यादा हो चुकी है। इस वजह से यह दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में शामिल हो गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बढ़ोतरी धीरे-धीरे नहीं बल्कि तेज गति से हो रही है और यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से जारी है, हालांकि इस पर ध्यान देने की कोशिशें कभी-कभी ही की गई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, समस्या सिर्फ ज्यादा लोगों के लिए जगह बनाने की नहीं है, बल्कि उन बुनियादी व्यवस्थाओं को बनाए रखने की भी है, जो एक ठीक तरह से चलने वाले समाज के लिए जरूरी हैं, जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, घर और रोजगार।

रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान के अस्पताल पहले से ही सीमित संसाधनों के साथ पूरी क्षमता पर काम कर रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से इलाज की मांग और उपलब्ध सुविधाओं के बीच अंतर बढ़ रहा है, जिससे इलाज की पहुंच और उसकी गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही है।

शिक्षा क्षेत्र में भी यही हाल है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के स्कूल बढ़ते छात्रों को संभालने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं।

भीड़भाड़ वाली कक्षाएं और सीमित सुविधाएं आम बात हो गई हैं। साथ ही, लाखों बच्चे अभी भी स्कूलों से बाहर हैं, जिससे साफ दिखता है कि जनसंख्या बढ़ने और शिक्षा व्यवस्था की क्षमता के बीच तालमेल नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये समस्याएं नई नहीं हैं, लेकिन जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, इनकी गंभीरता और बढ़ती जा रही है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पानी की कमी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आ रही है, खासकर उन शहरों में जो बिना सही योजना और बुनियादी ढांचे के तेजी से फैल रहे हैं। कई जगहों पर झुग्गी-झोपड़ियां बन रही हैं, जहां साफ पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।

मौजूदा हालात देखते हुए यह साफ है कि रोजगार के अवसर जनसंख्या की वृद्धि के हिसाब से नहीं बढ़े हैं, जिससे युवाओं में बेरोजगारी और कम रोजगार बढ़ रहा है।

पाकिस्तान के कई हिस्सों में परिवार नियोजन सेवाओं तक पहुंच भी सीमित है। साथ ही, सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों की वजह से लोगों के प्रजनन से जुड़े फैसलों पर भी असर पड़ता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमित पहुंच, सांस्कृतिक परंपराएं और कमजोर प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था मिलकर ऐसी स्थिति बना रही हैं, जिससे जनसंख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

चुनौती का पैमाना अब और साफ दिखने लगा है क्योंकि अनुमान बताते हैं कि आबादी आगे भी बढ़ती रहेगी। यह सिर्फ एक डेमोग्राफिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक अहम कारक बन चुका है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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