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पाकिस्तान पर दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप, आईएसआई की भूमिका भी सवालों के घेरे में

इस्लामाबाद, 9 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान को फर्जी खबरें फैलाने में महारत हासिल है। एक रिपोर्ट दावा करती है कि उसका दुष्प्रचार अभियान महज क्षेत्रीय तनाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इन्हें दुनिया के लोकतंत्रों को अस्थिर करने, हिंसा भड़काने और वैश्विक विश्वास को कमजोर करने वाले प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान पर दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप, आईएसआई की भूमिका भी सवालों के घेरे में

इस्लामाबाद, 9 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान को फर्जी खबरें फैलाने में महारत हासिल है। एक रिपोर्ट दावा करती है कि उसका दुष्प्रचार अभियान महज क्षेत्रीय तनाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इन्हें दुनिया के लोकतंत्रों को अस्थिर करने, हिंसा भड़काने और वैश्विक विश्वास को कमजोर करने वाले प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

शनिवार को एथेंस स्थित प्रकाशन 'डायरेक्ट्स' की रिपोर्ट सामने आई। जिसके अनुसार, पाकिस्तान की सैन्य-खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने सूचना युद्ध यानी “इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर” में विशेषज्ञता हासिल कर ली है।

रिपोर्ट कहती है कि “पाकिस्तान का दुष्प्रचार तंत्र गहराई से संस्थागत रूप ले चुका है। आईएसआई और इंटर-सर्विसेस पब्लिक रिलेशन्स (आईएसपीआर) मीडिया और साइबर अभियानों के लिए विशेष इकाइयों का संचालन करते हैं, जिनमें एक ‘इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट विंग’ भी शामिल है।”

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से जुड़े सरकारी तंत्र ट्रोल फार्म, फर्जी समाचार पोर्टल और बॉट नेटवर्क संचालित करते हैं। इसमें दावा किया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 50 से अधिक पाकिस्तान-समर्थित अकाउंट भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देते पाए गए। इन अकाउंट्स को लाखों व्यूज भी मिले हैं।

“पेशेवर” दुष्प्रचार तंत्र के वित्तपोषण पर भी रिपोर्ट सवाल खड़े करती है। इसमें कहा गया कि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए इतने बड़े स्तर पर सूचना युद्ध चलाना चौंकाने वाला है। लिखा, “यह हैरान करने वाली बात है कि गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा एक देश सूचना युद्ध पर इतना ज्यादा धन खर्च कर रहा है।”

पाकिस्तान के ऐसे दुष्प्रचार अभियान भारत के खिलाफ “प्रॉक्सी युद्ध” को सामान्य बनाने का काम कर रहे हैं, जिससे गलत आकलन और तनाव बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।

रिपोर्ट में 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उस दौरान भी पाकिस्तान-समर्थित बॉट नेटवर्क ने वैश्विक स्तर पर “भारत द्वारा नरसंहार” जैसे दावे फैलाए और भारत को आक्रामक देश के रूप में पेश करने की कोशिश की।

इसमें यह भी कहा गया कि भारत की “नो फर्स्ट यूज” परमाणु नीति स्पष्ट होने के बावजूद भारत द्वारा संभावित परमाणु हमले को लेकर झूठे डर का माहौल बनाया गया।

रिपोर्ट में मध्य पूर्व का जिक्र करते हुए कहा गया कि अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े हालिया संघर्ष के दौरान पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क भारत के लिए भ्रामक सामग्री फैला रहे हैं।

इनमें ऐसे अपुष्ट दावे भी शामिल थे कि भारत गुप्त रूप से ईरान पर अमेरिकी हमलों में खुफिया जानकारी साझा कर अमेरिका की मदद कर रहा था, जबकि इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिए गए।

अंत में लिखा गया कि "पाकिस्तान प्रायोजित दुष्प्रचार वास्तविकता को बदलने वाला असममित युद्ध (एसिमिट्रिक वॉरफेयर) है। यह दिल्ली से तेहरान तक अराजकता फैलाने का जोखिम पैदा करता है। लोकतांत्रिक देशों को इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मानना चाहिए, फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क मजबूत करने चाहिए और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना चाहिए। यदि इसे नजरअंदाज किया गया तो सच की जगह झूठ ले लेगा, वही परोसा जाएगा जिस पर वो चाहते हैं कि लोग विश्वास करें।”

--आईएएनएस

केआर/

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