पाकिस्तान की अफगान निर्वासन नीति पर वैश्विक आलोचना तेज: रिपोर्ट
लंदन, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान की ‘इलीगल फॉरेनर्स रिपैट्रिएशन प्लान’ (आईएफआरपी) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नीति बड़े पैमाने पर जबरन निर्वासन का उदाहरण बन गई है, जिसमें राजनीतिक हितों को मानव जीवन से ऊपर रखा गया है।
यूके आधारित अखबार एशियन लाइट की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 में शुरू हुई इस योजना के तहत 2026 की शुरुआत तक 20 लाख से अधिक अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान से वापस भेजा जा चुका है। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनके पास वैध दस्तावेज थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अभियान के दौरान मनमानी गिरफ्तारियां, वसूली और दबाव डालकर लोगों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करने जैसे कई आरोप सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने इस नीति को अपारदर्शी और भेदभावपूर्ण बताते हुए इसकी आलोचना की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक किए गए एक साल के आकलन में सामने आया कि 10 लाख से अधिक अफगानों को वापस भेजा गया, जबकि उनके पास बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी थी।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी आईएफआरपी की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध और अमानवीय” बताया है। मार्च 2025 में संगठन ने इस योजना को वापस लेने की मांग की थी और कहा था कि यह नीति अफगानों को “अपराधी और आतंकवादी” के रूप में पेश करती है, जबकि वे शरणार्थी हैं और अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत गंभीर खतरे का सामना कर सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नीति ‘नॉन-रिफाउलमेंट’ के सिद्धांत का उल्लंघन करती है, जिसके तहत किसी भी शरणार्थी को ऐसे स्थान पर वापस नहीं भेजा जा सकता जहां उसे उत्पीड़न, हिंसा या यातना का खतरा हो। यह 1951 शरणार्थी कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों के समझौते का भी उल्लंघन है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पाकिस्तान में कई अफगान शरणार्थियों ने पुलिस द्वारा वसूली, मारपीट और रात के समय छापेमारी के दौरान मनमानी गिरफ्तारियों के आरोप लगाए हैं। कई परिवारों को हिरासत से बचने के लिए रिश्वत तक देनी पड़ी।
अप्रैल 2025 से शुरू हुए दूसरे चरण में 2,30,500 अफगान लौटे, जिनमें 42,800 लोगों को निर्वासित किया गया। इनमें 70 प्रतिशत बिना दस्तावेज वाले, 19 प्रतिशत अफगान सिटीजन कार्ड धारक और 11 प्रतिशत प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन कार्ड धारक थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है, जिन्हें परिवार से अलग होना पड़ा, लौटने पर रहने की जगह नहीं मिली और तालिबान के प्रतिशोध का भी खतरा बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस मुद्दे पर चिंता तो जताई है, लेकिन ठोस कार्रवाई सीमित रही है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने सीमा पर निगरानी और राहत कार्य बढ़ाए हैं तथा पाकिस्तान से जबरन निर्वासन रोकने और करीब 14 लाख शरणार्थियों के पंजीकरण को नवीनीकृत करने की अपील की है।
--आईएएनएस
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