बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों पर मानवाधिकार विभाग सख्त, पाकिस्तान से जवाब मांगा
इस्लामाबाद, 26 जुलाई (आईएएनएस)। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने चार बलूच लोगों के जबरन गायब किए जाने की निंदा की। संगठन ने आरोप लगाया कि ये लोग पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई के बाद लापता हुए।
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने दर्ज किए गए मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ये घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन हैं। संगठन ने अधिकारियों से मांग की कि वे सभी लापता लोगों की तुरंत जानकारी दें और उनके ठिकाने का खुलासा करें।
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने कहा, "जबरन गायब किया जाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है। इसमें किसी व्यक्ति की आजादी छीन ली जाती है और उसे कानून की सुरक्षा से बाहर कर दिया जाता है। अधिकारियों को तुरंत सभी लापता लोगों की स्थिति और उनके ठिकाने के बारे में जानकारी देनी चाहिए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के जरिए कार्रवाई करनी चाहिए।"
संगठन के अनुसार, यासीन के बेटे आरिफ, जो दश्त शोलिग के रहने वाले मजदूर हैं, को 24 जुलाई को ग्वादर के पल्लिरी इलाके से कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया। मानवाधिकार विभाग ने बताया कि इस मामले में पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) की भूमिका होने की खबरें मिली हैं।
बर्खान निवासी रफीक के बेटे अतीक खेतरान को 21 जुलाई को उनके घर से पाकिस्तानी राज्य सुरक्षा बलों की ओर से कथित तौर पर उठा लिया गया।
संगठन ने यह भी बताया कि खारान के कुलान इलाके के रहने वाले छात्र मीरान बलूच (25) को 23 जुलाई को शाम करीब सात बजे क्वेटा के बशीर चौक से तीसरी बार गायब कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) की भूमिका बताई जा रही है।
संगठन ने नासिर बलूच के मामले का भी जिक्र किया, जो 18 वर्षीय छात्र हैं और क्वेटा के सरियाब रोड के रहने वाला है। नासिर को 27 मार्च की रात करीब 2 बजे सरियाब रोड से जबरन गायब कर दिया गया। रिपोर्टों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) की संलिप्तता की बात कही गई है।
मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान सरकार से मांग की कि वह इन लोगों की स्थिति और ठिकाने के बारे में तुरंत जानकारी दे। साथ ही, यह सुनिश्चित करे कि या तो उन्हें रिहा किया जाए या फिर जल्द से जल्द किसी सक्षम नागरिक अदालत के सामने पेश किया जाए।
मानवाधिकार संगठन ने इन घटनाओं की स्वतंत्र, पारदर्शी और प्रभावी जांच कराने की भी मांग की।
संगठन ने कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए, जबरन गायब किए जाने की प्रथा को खत्म करना चाहिए और पीड़ितों व उनके परिवारों को सच्चाई, न्याय और उचित सहायता दिलानी चाहिए।
--आईएएनएस
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