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निवेश बचाने के लिए पाकिस्तान के कदम, चीनी कामगारों की सुरक्षा पर विशेष फोकस: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 21 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान बीजिंग की मांगों के आगे झुकता नजर आ रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि पाकिस्तान की ओर से चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा इकाई का गठन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे चीनी कामगारों को स्थानीय आबादी से ऊपर प्राथमिकता दी जा रही है।
निवेश बचाने के लिए पाकिस्तान के कदम, चीनी कामगारों की सुरक्षा पर विशेष फोकस: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 21 फरवरी (आईएएनएस)। पाक‍िस्‍तान बीज‍िंग की मांगों के आगे झुकता नजर आ रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है क‍ि पाक‍िस्‍तान की ओर से चीनी नागर‍िकों की सुरक्षा के ल‍िए व‍िशेष सुरक्षा इकाई का गठन क‍िया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे चीनी कामगारों को स्थानीय आबादी से ऊपर प्राथमिकता दी जा रही है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, उग्रवाद की चुनौत‍ियों के बीच न‍िवेश बनाए रखने के प्रयास में पाक‍िस्‍तान लगातार चीन को महत्‍वपूर्ण र‍ियायतें दे रहा है।

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रिका 'द डिप्लोमैट' की एक रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी 2026 की शुरुआत में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश में चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से जिम्मेदार एक नई विशेष सुरक्षा इकाई के गठन की घोषणा की। यह कदम पाकिस्तान में चीनी नागरिकों, कामगारों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर उग्रवादी समूहों के लगातार हमलों के वर्षों बाद उठाया गया है।

रिपोर्ट में बताया गया कि चीनी हितों पर और ज्‍यादा ध्यान देकर पाकिस्तान अपने सबसे बड़े स्पॉन्सर को साथ रखने की बेचैनी दिखा रहा है। वहीं, बीजिंग इस्लामाबाद की कमजोर होती स्थिति का लाभ उठाकर देश में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है, जैसा कि उसने 2025 के दूसरे हाफ में करना शुरू किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर फिर से कब्जा किया है, चीन इस इलाके में अपनी अथॉरिटी बनाने और अमेरिका की कम होती मौजूदगी और असर का फायदा उठाने की कोश‍िश कर रहा है।

इस रणनीति से फायदा मिलने के बजाय, चीनी हित कई आतंकी और उग्रवादी ग्रुप के न‍िशाने पर आ गए हैं, जिससे चीनी कामगारों को हिंसा का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

हमलों में इस तेज वृद्धि का मुख्य केंद्र पाकिस्तान रहा, जहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने खास तौर पर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में चीनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाया है। हाल के महीनों में पड़ोसी अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में भी चीनी कामगारों, नागरिकों और व्यवसायों पर हमले बढ़ने लगे हैं।

र‍िपोर्ट में इस बात का भी उल्‍लेख क‍िया गया क‍ि चीन के प्रति दुश्मनी कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों में एक आम बात बन गई है, भले ही उनके रणनीतिक मकसद अलग-अलग हों।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 31 जनवरी को बीएलए की ओर से किए गए हमले के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा कमजोरियां उजागर हुईं। इस हमले में समन्वित आत्मघाती विस्फोट और गोलीबारी शामिल थी, जिसमें बलूचिस्तान में दर्जनों पाकिस्तानी पुलिस और सैन्य कर्मियों की मौत हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने बार-बार पाकिस्तान से कहा कि वह चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए देश में चीन की अपनी आर्म्ड सिक्योरिटी फोर्स को तैनात करने की इजाजत दे। यह पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर स्पष्ट अविश्वास को दर्शाता है। बीजिंग ने आगे बढ़कर ग्वादर बंदरगाह शहर में चीनी सैन्य कर्मियों की स्थायी तैनाती का प्रस्ताव भी रखा। हालांकि, इस्लामाबाद ने और अधिक संप्रभुता छोड़ने में हिचकिचाहट दिखाई है।

--आईएएनएस

अर्प‍ित/डीकेपी

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