Samachar Nama
×

पाकिस्तान में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा जारी: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 21 मार्च (आईएएनएस)। एक ओर जहां पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर ‘इस्लामोफोबिया’ के खिलाफ आवाज उठाता है, वहीं देश के भीतर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी भेदभाव और हिंसा उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पाकिस्तान में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा जारी: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 21 मार्च (आईएएनएस)। एक ओर जहां पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर ‘इस्लामोफोबिया’ के खिलाफ आवाज उठाता है, वहीं देश के भीतर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी भेदभाव और हिंसा उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

यूरोपियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामाबाद द्वारा इस्लामोफोबिया का मुद्दा उठाना कई बार एक कूटनीतिक रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, ताकि अपने यहां के हालात से ध्यान हटाया जा सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान खुद को दुनिया भर के मुसलमानों का रक्षक बताता है, लेकिन उसके अपने देश में शिया समुदाय के खिलाफ लंबे समय से हिंसा और भेदभाव जारी है। शिया मस्जिदों, जुलूसों और बस्तियों पर हमले होते रहे हैं, जिनमें अक्सर जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती।

अहमदिया समुदाय की स्थिति को रिपोर्ट ने और भी गंभीर बताया है। संविधान में गैर-मुस्लिम घोषित किए गए अहमदियों को कानूनी भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और भीड़ हिंसा का सामना करना पड़ता है। उनकी मस्जिदों पर हमले होते हैं और उनके धार्मिक आचरण तक को अपराध माना जाता है। यहां तक कि खुद को मुस्लिम बताने पर भी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की नीतियों में यह विरोधाभास उसकी सीमाओं के बाहर भी दिखता है। अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों, खासकर रमजान के दौरान, नागरिकों की मौतें इस बात पर सवाल उठाती हैं कि धार्मिक एकजुटता के दावे कितने वास्तविक हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘मुस्लिम उम्माह’ की एकता की बात अक्सर कूटनीतिक बयानबाजी में की जाती है, लेकिन इसे रणनीतिक हितों के हिसाब से ही लागू किया जाता है।

आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान के रुख पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सउदी अरब जैसे करीबी साझेदारों की अपेक्षाओं के बावजूद पाकिस्तान कई मौकों पर अपने आंतरिक सुरक्षा और अफगान मोर्चे का हवाला देकर पीछे हटता रहा है।

अंत में रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर मुस्लिम समुदायों की आवाज बनना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपने देश के भीतर हालात सुधारने होंगे। बिना निरंतरता और विश्वसनीयता के, उसकी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को भी अवसरवादी माना जा सकता है।

--आईएएनएस

डीएससी

Share this story

Tags