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पाकिस्तान: बीवाईसी ने जेल में 'फेसलेस ट्रायल' के खिलाफ धरना दिया, न्याय प्रक्रिया पर उठाए सवाल

क्वेटा, 16 जून (आईएएनएस)। मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) के नेताओं ने बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा स्थित हुडा जेल के अंदर धरना दिया। इनका विरोध उस ट्रायल पर था जो “फेसलेस” था, जिसे वे “असंवैधानिक, अवैध” और पारदर्शी न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ मानते हैं।
पाकिस्तान: बीवाईसी ने जेल में 'फेसलेस ट्रायल' के खिलाफ धरना दिया, न्याय प्रक्रिया पर उठाए सवाल

क्वेटा, 16 जून (आईएएनएस)। मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) के नेताओं ने बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा स्थित हुडा जेल के अंदर धरना दिया। इनका विरोध उस ट्रायल पर था जो “फेसलेस” था, जिसे वे “असंवैधानिक, अवैध” और पारदर्शी न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ मानते हैं।

बीवाईसी ने इसे लेकर एक बयान जारी किया। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा बयान में कहा कि यह विरोध मंगलवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी जेल प्रशासन ने जेल के अंदर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं।

बीवाईसी के अनुसार, “जेल के अंदर किसी भी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। हमारे नेताओं के परिजन और वकील घंटों इंतजार करते हैं, इसके बावजूद उनसे नहीं मिल पा रहे हैं।” संगठन ने आशंका जताई कि इस स्थिति में राज्य संस्थाएं हिरासत में लिए गए नेताओं पर दबाव बना सकती हैं या उत्पीड़न की कोशिश कर सकती हैं।

संगठन ने मांग की कि राजनीतिक कैदियों के कानूनी और मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए, जेल के अंदर चल रही सभी “अवैध कार्रवाइयों” को तुरंत रोका जाए और उनके नेताओं के खिलाफ चल रहे “फेसलेस ट्रायल” को समाप्त किया जाए।

बीवाईसी ने कहा कि उसके नेता पिछले 14 महीनों से बिना किसी वास्तविक अपराध के हिरासत में हैं। संगठन के अनुसार, इस दौरान शारीरिक रिमांड, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न सहित कई तरीकों से नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश की गई है। पहले खुले कोर्ट में सुनवाई, फिर जेल ट्रायल और अब “फेसलेस प्रोसीडिंग्स” (कार्यवाही) इन लगातार बदलती न्यायिक प्रक्रियाओं से यह स्पष्ट होता है कि ये फैसले कानून पर नहीं बल्कि शक्ति के प्रयोग पर आधारित हैं।

इस बीच, बीवाईसी की प्रमुख आयोजक महरंग बलूच सहित कई नेता मार्च 2025 से केंद्रीय हुडा जेल में बंद हैं। उनकी हिरासत को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने वैश्विक स्तर पर चिंता जताई है और इसे “फर्जी और राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों” पर आधारित बताया है।

इसी बीच, बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने भी महरंग बलूच और उनके साथियों के खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने इसे “दिखावे की न्यायिक प्रक्रिया” बताया।

बीएनएम ने कहा कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था वास्तव में सेना के अधीन एक “पपेट सिस्टम” (कठपुतली) की तरह काम कर रही है। उनके अनुसार, हुडा जेल के अंदर “फेसलेस कोर्ट” बना दी गई और इनके जरिए ही इन मामलों की सुनवाई की जा रही है। ये प्रक्रिया न्याय का मजाक है और शासकों द्वारा अपनी शक्ति के दुरुपयोग को दर्शाता है।

--आईएएनएस

केआर/

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