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यूरोप के लिए खतरा बन रहा पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान में पनप रहा आतंकवाद अब केवल क्षेत्रीय या दूरस्थ खतरा नहीं रह गया है, बल्कि यह यूरोप के लिए भी एक प्रत्यक्ष सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है। इससे बाहरी अस्थिरता के यूरोप के भीतर स्थायी संकट में बदलने का खतरा बढ़ रहा है। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।
यूरोप के लिए खतरा बन रहा पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान में पनप रहा आतंकवाद अब केवल क्षेत्रीय या दूरस्थ खतरा नहीं रह गया है, बल्कि यह यूरोप के लिए भी एक प्रत्यक्ष सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है। इससे बाहरी अस्थिरता के यूरोप के भीतर स्थायी संकट में बदलने का खतरा बढ़ रहा है। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।

‘यूरेशिया रिव्यू’ के लिए लिखते हुए ग्रीक वकील, लेखिका और पत्रकार दिमित्रा स्टाइको ने कहा कि पाकिस्तान भले ही अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थ की अपनी छवि को उभारने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान अब भी आतंकवादी संगठनों के लिए “उत्पत्ति केंद्र और सुरक्षित पनाहगाह” बना हुआ है, जो लगातार सक्रिय रहकर क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर रहे हैं।

रिपोर्ट में पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया गया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। इस हमले में पीड़ितों को उनके धर्म के आधार पर अलग कर निर्ममता से हत्या की गई थी, जिससे आतंकवाद के मानवीय और सामाजिक प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आए।

विशेषज्ञ के अनुसार, यह हमला कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि एक संगठित और गहराई से जमी हुई हिंसक व्यवस्था का हिस्सा था। इस तंत्र के केंद्र में ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) है, जो लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन माना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे संगठनों की गतिविधियां किसी आकस्मिक योजना का परिणाम नहीं, बल्कि क्षेत्र को अस्थिर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान में आतंकी संगठनों का “मुख्यधारा में आना” बढ़ा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रहे हैं।

2025 में मसूद अजहर के नेतृत्व में जैश-ए-मोहम्मद ने पंजाब और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भर्ती अभियान तेज किया और ‘जमात-उल-मोमिनात’ नाम से महिला विंग की स्थापना की। वहीं, 2024 से 2026 के बीच लश्कर-ए-तैयबा ने समुद्री अभियानों के लिए ‘वॉटर विंग’ जैसे विशेष प्रशिक्षण ढांचे विकसित किए।

रिपोर्ट के मुताबिक, भर्ती अभियान, जनसभाएं और भारत विरोधी बयानबाजी इस बात का संकेत हैं कि ये संगठन अब केवल भूमिगत नेटवर्क नहीं रह गए हैं, बल्कि समाज में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहे हैं और कट्टरपंथ को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा दे रहे हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि इसका प्रभाव यूरोप पर भी पड़ सकता है, क्योंकि अतीत में पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमलों की योजना, प्रशिक्षण और वित्तपोषण में शामिल रहे हैं। ऐसे में यह खतरा अब वैश्विक रूप लेता जा रहा है।

--आईएएनएस

डीएससी

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