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पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव बढ़ा, सीजफायर टूटने की आशंका गहराई

काबुल, 1 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष-विराम (सीजफायर) लगातार अस्थिर होता जा रहा है। ऐसा दोनों देशों के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के कारण है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव बढ़ा, सीजफायर टूटने की आशंका गहराई

काबुल, 1 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष-विराम (सीजफायर) लगातार अस्थिर होता जा रहा है। ऐसा दोनों देशों के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के कारण है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, डूरंड रेखा के दोनों ओर होने वाली घटनाओं और आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए किसी विश्वसनीय तंत्र के अभाव में विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र के लंबे समय तक अस्थिरता के दौर में फंसने का खतरा है, जिसका सबसे ज्यादा बोझ आम नागरिकों को उठाना पड़ेगा।

'अफगान डायस्पोरा नेटवर्क' के लिए लिखते हुए काबुल के फ्रीलांस रिसर्चर और पत्रकार एसएस अहमद ने कहा कि जब अप्रैल के आखिर में पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान में हमले किए, तो उनका पहला असर आम नागरिकों पर पड़ा। इन हमलों में घरों, सार्वजनिक सुविधाओं और कुनार यूनिवर्सिटी के कुछ हिस्सों को निशाना बनाया गया था। मार्च में हुए सीजफायर के बाद से यह सबसे गंभीर तनावपूर्ण घटनाओं में से एक थी।

अफगान अधिकारियों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि इन हमलों में रिहायशी इलाके, एक फ्यूल स्टेशन, एक नशा मुक्ति केंद्र और यूनिवर्सिटी कैंपस में मौजूद छात्रों के एक हॉस्टल को निशाना बनाया गया। इन हमलों में चार आम नागरिकों की मौत हो गई और 70 से ज्यादा लोग घायल हो गए, जिनमें महिलाएं, बच्चे और छात्र शामिल थे।

उन्होंने बताया, “तालिबान ने इस हमले की निंदा करते हुए ‘माफ न किए जा सकने वाला युद्ध अपराध’ बताया और पाकिस्तान पर जान-बूझकर आम नागरिकों की जगहों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। पाकिस्तान ने आरोपों से इनकार करते हुए जोर देकर कहा कि उसकी सेनाओं ने यूनिवर्सिटी पर हमला नहीं किया, बल्कि वे डूरंड लाइन के पास आतंकियों के खतरों का जवाब दे रही थीं।”

उन्होंने कहा कि यह तनाव अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक के पास हुई एक गोलीबारी के बाद पैदा हुआ, जिसमें एक बच्चा मारा गया था। इस घटना के लिए दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के समय और पैमाने को देखते हुए यह चिंता पैदा हो गई है कि चीन, तुर्की, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब की मध्यस्थता से मार्च में हुआ संघर्ष विराम अब गंभीर संकट में है।

अफगानिस्तान भर में मानवीय स्थिति पर पड़े गंभीर असर को उजागर करते हुए अहमद ने कहा, “फरवरी से अब तक पूर्वी अफगानिस्तान में 1,00,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। स्कूल, क्लीनिक और पानी की व्यवस्थाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं या बंद कर दी गई हैं। कुनार और नंगरहार में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी उन्नीस सुविधाएं अब आंशिक रूप से या पूरी तरह से काम नहीं कर रही हैं। शिक्षण संस्थानों पर हमले होने या उन्हें खाली कराए जाने के बाद 13,000 से ज्यादा छात्रों की पढ़ाई में रुकावट आ गई है।”

उन्होंने कहा, “मार्च में हुए संघर्ष-विराम में मध्यस्थता करने वाले क्षेत्रीय पक्ष इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। विशेष रूप से, चीन ने डूरंड रेखा के साथ सुरक्षा को स्थिर करने में अपनी कूटनीतिक पूंजी का निवेश किया है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि शत्रुता का यह सिलसिला जारी रहने से क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाएं कमजोर पड़ सकती हैं और आतंकवाद-रोधी सहयोग में जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।”

अहमद ने इस बात पर जोर दिया कि इन हमलों से अफगानिस्तान का अलगाव और गहरा होता है और साथ ही आम नागरिकों को हिंसा के एक और चक्र का सामना करना पड़ता है, एक ऐसा संघर्ष जो कई सरकारों, गठबंधनों और राजनीतिक युगों से भी अधिक समय तक चला आ रहा है।

--आईएएनएस

एबीएम/वीसी

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