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बलूचिस्तान में 2026 के पहले छह महीनों में 507 जबरन गुमशुदगी, 150 लोगों की हत्या का दावा

बलूचिस्तान में 2026 के पहले छह महीनों में 507 जबरन गुमशुदगी, 150 लोगों की हत्या का दावा
बलूचिस्तान में 2026 के पहले छह महीनों में 507 जबरन गुमशुदगी, 150 लोगों की हत्या का दावा

क्वेटा, 30 सितंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) की एक रिपोर्ट में गंभीर दावे किए गए हैं। बीवाईसी के मानवाधिकार विभाग के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में बलूचिस्तान में 507 लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया। इनमें से 150 लोगों को अल्पकालिक हिरासत के बाद रिहा किया गया, जबकि 32 लोगों की हिरासत के दौरान मौत होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 303 लोग अब भी लापता हैं और उनके परिवारों को उनके ठिकाने या स्थिति की कोई जानकारी नहीं दी गई है।

बीवाईसी के अनुसार, जबरन गुमशुदगी के मामलों में 44 नाबालिग और 20 से अधिक महिलाएं भी शामिल हैं। क्वेटा और केच में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई।

संगठन ने आरोप लगाया है कि इन मामलों में पाकिस्तानी अर्धसैनिक बल फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) की भूमिका प्रमुख रही है। रिपोर्ट में 180 मामलों में एफसी, 93 मामलों में सीटीडी, 42 मामलों में पाकिस्तानी सेना और 20 मामलों में कथित राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड की संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। कुछ मामलों में सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों, सीटीडी, पुलिस और डेथ स्क्वॉड की संयुक्त कार्रवाई का भी दावा किया गया है।

रिपोर्ट में 2026 के पहले छह महीनों के दौरान बलूच नागरिकों की 150 हत्याओं का भी दस्तावेजीकरण किए जाने की बात कही गई है। इनमें 15 नाबालिग शामिल हैं। बीवाईसी के मुताबिक, सबसे अधिक हत्याएं पंजगुर में दर्ज की गईं। इसके बाद केच और ग्वादर का स्थान रहा। संगठन ने आरोप लगाया कि इन हत्याओं में कथित राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड की भूमिका सबसे अधिक रही, जिसके बाद एफसी और पाकिस्तानी सेना का स्थान है।

बीवाईसी ने अपनी रिपोर्ट में बलूच कार्यकर्ताओं महरंग बलूच और बेबार्ग बलूच के कथित उत्पीड़न का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, दोनों मार्च 2025 से हिरासत में हैं। बीवाईसी का आरोप है कि खुफिया एजेंसियों के इशारे पर जेल प्रशासन ने कई बार दोनों को बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच से वंचित किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 के पहले छह महीनों में बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति और खराब हुई है। संगठन के अनुसार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा, आवाजाही और विरोध प्रदर्शन जैसे मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए।

बीवाईसी ने आरोप लगाया कि मानवाधिकार संगठनों, जबरन लापता किए गए लोगों के परिवारों और राजनीतिक समूहों की ओर से किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के खिलाफ अधिकारियों ने बार-बार उत्पीड़न, धमकी, गिरफ्तारी और बल प्रयोग का सहारा लिया।

रिपोर्ट में पाकिस्तानी सुरक्षा संस्थानों पर लगाए गए आरोपों को बीवाईसी के दावों के रूप में पेश किया गया है। स्वतंत्र रूप से इन सभी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग संगठनों के आंकड़े भी एक-दूसरे से भिन्न हैं। उदाहरण के लिए, बलूचिस्तान स्थित अन्य मानवाधिकार संगठन (पांक) ने जनवरी-जून 2026 के लिए 556 जबरन गुमशुदगी और 227 कथित न्यायेतर या हिरासत में हत्याओं का आंकड़ा दिया है।

--आईएएनएस

डीएससी

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