बुंदेलखंड की अखाड़ा परंपरा के संरक्षक पद्मश्री ‘दाऊ’ का भोपाल में निधन
भोपाल, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। पद्मश्री भगवानदास रैकवार का शनिवार रात भोपाल एम्स में 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे 'दाऊ' के नाम से लोकप्रिय थे।
पद्मश्री भगवानदास रैकवार सांस की बीमारी से जूझ रहे थे। शनिवार रात करीब 9.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से मध्य प्रदेश के खेल और सांस्कृतिक जगत, खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
बुंदेलखंड की धरती के सच्चे सपूत, भगवानदास रैकवार ने अपना पूरा जीवन पारंपरिक 'अखाड़ा' संस्कृति और 'लाठी' चलाने की युद्ध कला को बचाने और बढ़ावा देने में समर्पित कर दिया।
वर्ष 1964 में अपने सीमित निजी संसाधनों का उपयोग करते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश के सागर शहर में ऐतिहासिक 'छत्रसाल बुंदेलखंड अखाड़ा' की स्थापना की। उन्होंने दशकों के दौरान एक हजार से अधिक छात्रों को पारंपरिक हथियारों और आत्मरक्षा की तकनीकों में प्रशिक्षित किया और उस समय 'बुंदेली' युद्ध कला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।
खेल और संस्कृति के क्षेत्र में उनके आजीवन योगदान को मान्यता देते हुए केंद्र सरकार ने इस वर्ष 25 जनवरी को उन्हें प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि बुंदेली मार्शल आर्ट को वैश्विक पहचान दिलाने वाले, ‘पद्म श्री’ के लिए चयनित भगवानदास रैकवार जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत को शांति और शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।
उनकी तबीयत खराब होने के बाद सात अप्रैल को एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। मेडिकल टीम के काफी प्रयासों के बावजूद, उन्हें बचाया नहीं जा सका।
--आईएएनएस
एसडी/एबीएम

