भारत-म्यांमार के बीच पहली त्रि-सेवा आपदा राहत सैन्य कवायद 'राहत मित्र' शुरू, 300 से अधिक जवान ले रहे हिस्सा
चेन्नई, 6 नवंबर (आईएएनएस)। भारत और म्यांमार के बीच पहली त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) सैन्य कवायद 'राहत मित्र' गुरुवार को चेन्नई में शुरू हुई। इस दो दिवसीय संयुक्त अभ्यास में दोनों देशों के 300 से अधिक रक्षा कर्मी हिस्सा ले रहे हैं।
भारतीय नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि 'राहत मित्र' का उद्घाटन अभ्यास 5 नवंबर को चेन्नई में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य मानवीय सहयोग के माध्यम से दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करना है। इस अभ्यास में थल, समुद्र और वायु क्षेत्र में जटिल एवं एकीकृत सैन्य गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिनके जरिए आपदा की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के तत्वावधान में 5 से 6 नवंबर तक आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, आपसी विश्वास बढ़ाना और दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच समन्वय बेहतर करना है।
मंत्रालय ने कहा कि यह पहला संयुक्त अभ्यास भारतीय और म्यांमार के रक्षा बलों को पेशेवर अनुभव साझा करने, एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में आपसी तालमेल बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इसमें दोनों देशों की थल सेना, नौसेना और वायुसेना के 300 से अधिक कर्मी शामिल हैं। यह मानवीय सहयोग और क्षेत्रीय आपदा प्रतिक्रिया के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह अभ्यास भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (नेबरहुड फर्स्ट) नीति और 'महासागर' (क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की रणनीतिक सोच के प्रति प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करता है। इससे शांति एवं स्थिरता बनाए रखने और संकट के समय मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के दोनों देशों के साझा संकल्प को मजबूती मिलेगी।
अभ्यास के दौरान भारतीय सेना ने भी अपनी आपदा राहत क्षमताओं का प्रदर्शन किया। भारतीय नौसेना और वायुसेना के साथ सेना के जवानों ने बाढ़ राहत टुकड़ियों (फ्लड रिलीफ कॉलम) और इंजीनियर टास्क फोर्स की क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
रक्षा मंत्रालय के चेन्नई स्थित जनसंपर्क अधिकारी ने एक्स पर बताया कि इस दौरान बचाव अभियान, जल निकासी और संपर्क बहाल करने के लिए पुल निर्माण जैसी गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया। इन अभियानों के जरिए आपदा की स्थिति में तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त कार्रवाई और समन्वय की क्षमता को प्रदर्शित किया गया।
--आईएएनएस
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