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शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान बलूच और पश्तून कार्यकर्ताओं ने जताया व‍िरोध, यूएन परिसर के बाहर क‍िया प्रदर्शन

शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान बलूच और पश्तून कार्यकर्ताओं ने जताया विरोध, यूएन परिसर के बाहर किया प्रदर्शन
शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान बलूच और पश्तून कार्यकर्ताओं ने जताया व‍िरोध, यूएन परिसर के बाहर क‍िया प्रदर्शन

संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान बलूच और पश्तून कार्यकर्ताओं ने यूएन परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपने समुदाय के लोगों की हत्या, जेल में डाले जाने और जबरन गायब किए जाने के कथित मामलों का विरोध किया।

शुक्रवार को अलग-अलग हुए प्रदर्शनों में बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) और पश्तून तहफुज मूवमेंट (पीटीएम) के समर्थकों ने बलूच और पश्तून लोगों पर कथित हमले और उनके दमन को रोकने की मांग की।

न्यूयॉर्क में बीएनएम का विरोध प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब जिनेवा में संगठन का तीन दिन का सम्मेलन भी चल रहा था।

इस सम्मेलन में 'बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति, जबरन गायब किए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याएं, सामूहिक सजा और राजनीतिक आजादी पर पाबंदियां' जैसे मुद्दे उठाए गए।

बीएनएम की वेबसाइट के मुताबिक, संगठन ने जिनेवा में भी एक रैली की।

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान बीएनएम ने जिनेवा में एक विरोध रैली निकाली। संगठन ने कहा कि इसका मकसद बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचना था।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कई तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर लिखा था, 'वे आम नागरिक थे, निशाना नहीं। यूएन अब कार्रवाई करे और बलूचिस्तान में सामूहिक सजा बंद कराए', 'जबरन गायब करना बंद करो' और 'बलूचिस्तान पर पाकिस्तान ने कब्जा किया है।' ये सभी नारे और आरोप प्रदर्शनकारियों के अपने दावे थे।

बीएनएम के मुताबिक, जिनेवा के ब्रोकन चेयर स्मारक पर एक फोटो प्रदर्शनी और विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। यहां प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान में कथित तौर पर बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति की ओर दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश की।

पश्तूनों का प्रतिनिधित्व करने वाले पश्तून तहफुज मूवमेंट (पीटीएम) ने अपने प्रदर्शन के दौरान एक प्रस्ताव पढ़ा।

इसमें संगठन ने कहा कि वह बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, लोगों को जबरन गायब किए जाने और अपने इलाकों में बिना फटे गोला-बारूद के पड़े होने से जुड़ी विश्वसनीय शिकायतों को लेकर बेहद चिंतित है।

पश्तूनों को ऐसे समुदाय के रूप में बताया गया है, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करने वाली डूरंड लाइन के दोनों तरफ रहते हैं। पीटीएम इस सीमा को मनमाने ढंग से खींची गई सीमा मानता है।

पीटीएम ने अफगानिस्तान के अंदर पश्तून इलाकों में पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर किए गए जमीनी और हवाई हमलों की भी निंदा की। संगठन ने पाकिस्तान पर पहले तालिबान का समर्थन करने का आरोप लगाया और पाकिस्तान की ओर से अतीत और वर्तमान में 'हथियारबंद समूहों' को कथित समर्थन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

पीटीएम ने तालिबान से अपनी अलग पहचान पर जोर देते हुए अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा तथा घर से बाहर काम करने पर लगी पाबंदियों की भी निंदा की।

--आईएएनएस

एवाई/एएस

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