विपक्ष ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च की आलोचना की, रैली की अनुमति देने पर उठाए सवाल
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली में इंडी ब्लाक की मेगा रैली से पहले बुधवार को विपक्षी नेताओं ने भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च की आलोचना की। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
आईएएनएस से बात करते हुए, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि लोकतंत्र को भाजपा से बचाने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव आयोग, वित्तीय संस्थानों और जांच एजेंसियों सहित कई संस्थाओं को कमजोर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि यह सुनकर मुझे हंसी आ रही है। लोकतंत्र को भारतीय जनता पार्टी से बचाने की जरूरत है क्योंकि जिस तरह से वह हर संस्था को कमजोर कर रही है, चाहे वह चुनाव आयोग हो, हमारे वित्तीय संस्थान हों या जांच एजेंसियां, वह चिंताजनक है। भाजपा ने राजनीतिक दलों को बनाने, कमजोर करने और तोड़ने के लिए इन संस्थाओं का गलत इस्तेमाल किया है और इसीलिए हम लोकतंत्र को बचाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह तो वही बात हो गई कि 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे'।
सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि हर राजनीतिक दल को मार्च, रैली और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का अधिकार है। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि सरकार और प्रशासन, सत्ताधारी भाजपा और विपक्ष द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के साथ अलग-अलग तरह का बर्ताव क्यों करते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने कार्यक्रम, मार्च, रैली और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का अधिकार है। हालांकि सरकार और प्रशासन इन कार्यक्रमों के साथ कैसा बर्ताव करते हैं, यह मायने रखता है। अगर यह सत्ताधारी पार्टी का कार्यक्रम होता है, तो सारी व्यवस्थाएं की जाती हैं और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, जब विपक्ष का कार्यक्रम होता है, तो कई तरह की पाबंदियां लगा दी जाती हैं। रामलीला मैदान के लिए जो शर्तें रखी गई हैं, वे तो हद दर्जे की ज्यादती हैं।
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी भाजपा के प्रस्तावित मार्च पर तंज कसते हुए कहा कि "लोकतंत्र बचाने" के नाम पर कार्यक्रम आयोजित करके भाजपा खुद लोगों के बीच हंसी का पात्र बन सकती है।
उन्होंने कहा कि बिल्कुल, आप लोकतंत्र बचाने के लिए मार्च निकालना चाहते हैं, जरूर निकालिए। यह अलग बात है कि सड़क पर चलने वाले लोग आप पर हंसेंगे। खैर, अगर वे खुद को हंसी का पात्र बनाना चाहते हैं, तो वे ऐसा कर सकते हैं।
दीक्षित ने मार्च की शुरुआत के लिए भाजपा द्वारा लाल किले को चुने जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने इस ऐतिहासिक स्मारक के महत्व और मुगल इतिहास के प्रति भाजपा के नजरिए की ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा कि मैं एक बात पूछना चाहता हूं कि लाल किला मुगल सत्ता का प्रतीक है। वे बार-बार इसी जगह पर क्यों आते हैं? मेरे हिसाब से, उन्होंने जो इतिहास पेश किया है, उसमें तो लाल किला है ही नहीं क्योंकि उन्होंने मुगलों को अपने इतिहास में शामिल ही नहीं किया है। तो फिर, जो स्मारक उनके इतिहास में मौजूद ही नहीं है, वहां से वे पदयात्रा कैसे शुरू कर सकते हैं।
एनसीपी(एसपी) के प्रवक्ता अनीश गवांडे ने राजनीतिक रैलियों के लिए अनुमति देने में बरते जा रहे कथित भेदभाव पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि भाजपा को अपने कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति क्यों मिल जाती है जबकि अन्य समूहों को पाबंदियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने पूछा कि मुझे खुशी है कि नितिन नवीन एक रैली कर रहे हैं। हालांकि कोई उनसे यह तो पूछे कि उनकी रैली को अनुमति कैसे मिल जाती है, जबकि दूसरों को अपनी रैलियों के लिए अनुमति नहीं दी जाती? अगर आप कोई छात्र आंदोलन करना चाहें, तो आपको अनुमति नहीं मिलती। अगर आप अंकिता भंडारी के माता-पिता हैं, तो आपको अनुमति नहीं मिलती। फिर भारतीय जनता पार्टी को ही अनुमति क्यों दी जाती है।
गवांडे ने भाजपा पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि इस बात पर सवाल उठने चाहिए कि जो लोग कथित तौर पर लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं, उन्हें रैलियां आयोजित करने की अनुमति क्यों दी जा रही है। यह सवाल पूछना बहुत जरूरी है।
--आईएएनएस
डीकेएम/पीएम

