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ओडिशा : बीजेडी-कांग्रेस के 11 विधायकों की अयोग्यता याचिका को विधानसभा अध्यक्ष ने किया खारिज

भुवनेश्वर, 22 जून (आईएएनएस)। ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने कांग्रेस और बीजेडी दोनों दलों द्वारा दाखिल अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें मार्च में राज्यसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी।
ओडिशा : बीजेडी-कांग्रेस के 11 विधायकों की अयोग्यता याचिका को विधानसभा अध्यक्ष ने किया खारिज

भुवनेश्वर, 22 जून (आईएएनएस)। ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने कांग्रेस और बीजेडी दोनों दलों द्वारा दाखिल अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें मार्च में राज्यसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी।

मीडिया से बात करते हुए अध्यक्ष सुरमा पाधी ने सोमवार को कहा कि याचिकाएं इस आधार पर खारिज की गईं क्योंकि उनमें नियम 6 के उप-नियम 6 और 7 के तहत अपेक्षित पर्याप्त तथ्य प्रस्तुत नहीं किए गए थे।

उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ताओं ने याचिका के समर्थन में आवश्यक शपथपत्र दाखिल नहीं किया था। इसी तरह, याचिकाओं के साथ संलग्न परिशिष्टों पर उचित रूप से हस्ताक्षर और सत्यापन नहीं किया गया था।

ये सभी अनिवार्य प्रावधान ओडिशा विधानसभा के सदस्यों (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1987 के नियम 6(6) और 6(7) के तहत निर्धारित हैं। आवेदन को नियम 7(2) के तहत खारिज कर दिया गया।

अध्यक्ष ने कहा कि याचिकाएं संक्षिप्त, अस्पष्ट और बिना आधार वाली थीं, जो मेरिट पर निर्णय के लिए कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थीं।

बीजेडी और कांग्रेस ने 11 विधायकों (आठ बीजेडी विधायक, जिनमें दो निलंबित पार्टी विधायक शामिल हैं, और तीन कांग्रेस विधायक) को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी, जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी और दोनों दलों द्वारा जारी व्हिप का उल्लंघन किया था।

विपक्षी दलों ने इन विधायकों की कड़ी आलोचना की थी और इसे अनुशासन और संवैधानिक प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन बताया था। इन बागी विधायकों पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयान देने का भी आरोप लगाया गया था।

जहां सत्तारूढ़ भाजपा ने इस फैसले का स्वागत किया, वहीं विपक्षी बीजेडी और कांग्रेस ने इसकी आलोचना की और कहा कि वे स्पीकर के फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्प तलाशेंगे।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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