अक्टूबर में ब्याज दरों में हो सकती है 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी, महंगाई 5.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर की मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) में ब्याज दरों को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है। साथ ही, कहा गया कि अगले कुछ महीनों में बैंकिंग सिस्टम से 6 लाख करोड़ रुपए की तरलता हटाने की आवश्यकता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई दर अगस्त में 4.8 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में लगभग 5.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है और 2026 की चौथी तिमाही में यह औसतन 6 प्रतिशत से थोड़ी अधिक हो सकती है।
6 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त तरलता में से, लगभग 2 लाख करोड़ रुपए की जरूरत को सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी से पूरा किया जा सकता है, जबकि बाकी हिस्से को ओपन मार्केट ऑपरेशन सेल्स, फॉरेन-एक्सचेंज स्पॉट सेल्स, एफएक्स स्वैप और वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो जैसे मौजूदा तरीकों से मैनेज किया जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी में कमी धीरे-धीरे होने की संभावना है, जब तक कि कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) बढ़ाने जैसे कड़े उपायों का इस्तेमाल न किया जाए।
रिपोर्ट में कहा गया, "मुख्य महंगाई में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिसकी मुख्य वजह सर्विस सेक्टर में महंगाई है। हमारा अनुमान है कि अगले 12 महीनों में महंगाई औसतन 5 प्रतिशत से ज्यादा रहेगी।"
रिपोर्ट में बाहरी हालात को चिंताजनक बताया गया है, क्योंकि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही हैं और 2027 के लिए तेल की कीमत का अनुमान 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। तेल की ऊंची कीमतें, साथ ही ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर का मजबूत होना, आमतौर पर उभरते बाजारों में पूंजी के प्रवाह के लिए अच्छा नहीं होता है और हाल ही में देश में पूंजी की निकासी भी देखी गई है।
रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था की जबरदस्त मजबूती पर भी जोर दिया गया है। इसमें बताया गया है कि यूके-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने के एक महीने बाद यूके को होने वाले निर्यात में महीने-दर-महीने के आधार पर 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
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