बांग्लादेश में लगातार बढ़ रही पढ़े-लिखे बेरोजगारों की संख्या, बेहतर भविष्य के लिए युवा छोड़ रहे देश: रिपोर्ट
ढाका, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। बेहतर शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित भविष्य की तलाश में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा देश छोड़कर विदेशों में बस रहे हैं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
बांग्लादेशी अखबार 'द डेली ऑब्जर्वर' की रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल हजारों युवा विश्वविद्यालयों से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी करते हैं, लेकिन उन्हें लंबे समय तक नौकरी की तलाश करनी पड़ती है। कई युवाओं को ऐसे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिनका उनके शैक्षणिक विषयों और योग्यताओं से कोई संबंध नहीं होता।
वहीं, बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली युवा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जा रहे हैं। उनकी प्रतिभा और कौशल का इस्तेमाल बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में हो सकता था, लेकिन अब वे दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं में योगदान दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों स्थितियों के पीछे शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियां, रोजगार के सीमित अवसर और प्रतिभा को पहचानने तथा उसका उचित सम्मान करने में विफलता जैसे कारण हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बांग्लादेश उन युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर तैयार कर पा रहा है, जिनसे देश के भविष्य को आकार देने की उम्मीद की जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की शिक्षा व्यवस्था तेजी से हो रहे तकनीकी विकास और वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव के अनुरूप खुद को ढालने में संघर्ष कर रही है। देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा सैद्धांतिक ज्ञान और रटकर सीखने पर आधारित है, जबकि आधुनिक उद्योगों, कारोबार और तकनीकी क्षेत्र में व्यावहारिक ज्ञान, समस्या सुलझाने की क्षमता और नई तकनीकों की समझ की जरूरत है।
इसका नतीजा यह है कि युवाओं को नौकरी के बाजार में कदम रखने के बाद ही अपनी शिक्षा और नियोक्ताओं की अपेक्षाओं के बीच अंतर का एहसास होता है। इस कारण देश में पढ़े-लिखे बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं, उपयुक्त कौशल वाले स्थानीय कर्मचारियों की कमी के चलते घरेलू कंपनियों को कई महत्वपूर्ण पदों पर विदेश से लोगों की नियुक्ति करनी पड़ रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि योग्य नौकरियों की कमी, अपेक्षाकृत कम वेतन, पेशेवर पहचान का अभाव और शोध के सीमित अवसरों के कारण प्रतिभाशाली युवा विदेशों का रुख कर रहे हैं। इनमें से कई युवा उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं और बाद में वहीं नौकरी करने लगते हैं। कुछ अंततः स्थायी रूप से दूसरे देशों में बस जाते हैं।
इस बीच, अगस्त में सामने आए एक सर्वेक्षण ने भी बांग्लादेश के युवाओं के सामने बढ़ते रोजगार संकट को उजागर किया था। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कई युवा अपनी शिक्षा और कौशल को रोजगार के अवसरों में बदलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सर्वेक्षण में बेरोजगारी को देशभर के युवाओं की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया था।
'बांग्लादेश में युवाओं की समस्याएं और संभावित समाधान' शीर्षक से किए गए इस सर्वेक्षण में बेरोजगारी, कौशल की कमी, मानसिक तनाव, डिजिटल लत, ऑनलाइन जुआ और नशे की समस्या को युवाओं के सामने प्रमुख चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया गया। इसके अलावा, नीतिगत फैसले लेने की प्रक्रिया में युवाओं की सीमित भागीदारी का मुद्दा भी उठाया गया।
बांग्लादेशी अखबार 'ढाका ट्रिब्यून' के अनुसार, यह सर्वेक्षण अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 2026 के अवसर पर सामाजिक शोध एवं जनहित से जुड़े संगठन 'स्वप्नपुरी कल्याण संस्था' और 'बांग्लादेश को-क्रिएशन' ने संयुक्त रूप से किया था। इस सर्वेक्षण में बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों से छात्रों, युवा संगठनों के प्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों, सामाजिक एवं विकास कार्यकर्ताओं और युवा पहलों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।
सर्वेक्षण में कई प्रतिभागियों ने बेरोजगारी को बड़ी चिंता बताया। इसके साथ ही युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी भावनात्मक स्थिति से जुड़ी समस्याओं पर भी चिंता जताई गई। डिसेबल वेलफेयर सोसाइटी बांग्लादेश की सदस्य सालेहा के ने युवाओं में बढ़ती निराशा और अवसाद को प्रमुख चिंताओं में शामिल किया। वहीं, गबुरा वेलफेयर सोसाइटी के आयोजन सचिव रबीउल इस्लाम ने कहा कि भविष्य को लेकर अनिश्चितता, आत्मविश्वास की कमी और उचित मार्गदर्शन का अभाव बांग्लादेश के युवाओं को तेजी से मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है।
--आईएएनएस
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