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देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं, आपूर्ति भी स्थिर : केंद्र

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य स्तरों से अधिक एवं स्थिर बनी हुई है। साथ ही कहा कि मौजूदा समय में देश में वार्षिक जरूरत का करीब 51 प्रतिशत स्टॉक उपलब्ध है।
देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं, आपूर्ति भी स्थिर : केंद्र

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य स्तरों से अधिक एवं स्थिर बनी हुई है। साथ ही कहा कि मौजूदा समय में देश में वार्षिक जरूरत का करीब 51 प्रतिशत स्टॉक उपलब्ध है।

भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत आने वाले उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा कि चालू वर्ष में देश में 390.54 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की आवश्यकता होगी। वहीं, मौजूदा उर्वरकों का स्टॉक स्तर 200.12 लाख मीट्रिक टन है, जो कि बेंचमार्क 33 प्रतिशत से काफी अधिक है।

शर्मा ने कहा कि मध्य पूर्व संकट शुरू होने के बाद घरेलू उत्पादन और आयात मजबूत बने रहे हैं, जिससे उर्वरकों की उपलब्धता को समर्थन मिला है।

उन्होंने बताया कि कुल घरेलू उत्पादन लगभग 95 लाख मीट्रिक टन रहा है, जबकि लगभग 22.60 लाख मीट्रिक टन के आयात ने आपूर्ति को और मजबूत किया है। इससे उर्वरकों की उपलब्धता में 117.6 लाख मीट्रिक टन बढ़ी है।

अतिरिक्त सचिव ने बताया कि देश ने प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा सुरक्षित कर ली है, जिसमें 13.5 लाख मीट्रिक टन डायअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और 9 लाख मीट्रिक टन नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम (एनपीके) जैसे मिश्रित उर्वरक शामिल हैं, जिससे आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है।

उर्वरक उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता भी संतोषजनक बनी हुई है और विभाग द्वारा इसकी नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है।

सरकार ने बताया कि यूरिया का घरेलू उत्पादन 57.66 लाख मीट्रिक टन रहा, जबकि आयात 13.60 लाख मीट्रिक टन रहा। डीएपी का उत्पादन 7.93 लाख मीट्रिक टन रहा, जबकि आयात 0.88 लाख मीट्रिक टन रहा।

एनपीके का घरेलू उत्पादन 18.71 लाख मीट्रिक टन रहा और आयात 4.44 लाख मीट्रिक टन रहा।

इसके अतिरिक्त, सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का उत्पादन 10.70 लाख मीट्रिक टन रहा और इसका कोई आयात नहीं हुआ, जबकि पोटेशियम क्लोराइड या म्यूरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) पूरी तरह से आयात पर निर्भर था, जिसका 3.68 लाख मीट्रिक टन आयात किया गया और कोई घरेलू उत्पादन नहीं हुआ।

--आईएएनएस

एबीएस/

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