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बलूचिस्तान में गर्ल्स स्कूल की स्थिति बदहाल, 200 से ज्यादा छात्राओं को पढ़ाते हैं 6-7 शिक्षक

बलूचिस्तान में गर्ल्स स्कूल की स्थिति बदहाल, 200 से ज्यादा छात्राओं को पढ़ाते हैं 6-7 शिक्षक
बलूचिस्तान में गर्ल्स स्कूल की स्थिति बदहाल, 200 से ज्यादा छात्राओं को पढ़ाते हैं 6-7 शिक्षक

क्वेटा, 25 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान के हुक्मरान बलूचिस्तान में बड़ों को ही उनके हक से महरूम नहीं रख रहे, बल्कि अगली पीढ़ी से अच्छी शिक्षा का अधिकार भी छीन रहे हैं। बलूचिस्तान के खुजदार जिले में लड़कियों के एक सरकारी स्कूल के हालात बेहद खराब हैं, जिसे लेकर बलूच लिटरेसी कैंपेन (बीएलसी) ने गंभीर चिंता जताई है। आरोप है कि जानबूझकर स्कूल में मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही हैं।

बीएलसी, बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) की एक पहल है, जिसने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी को लेकर सवाल उठाए हैं।

बीएलसी के अनुसार, खुजदार के ग्रेशाग क्षेत्र स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल सर्रेज में 200 से अधिक छात्राएं पढ़ती हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए केवल 6 से 7 शिक्षक ही उपलब्ध हैं। संगठन का कहना है, "शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्राओं को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई में परेशानी हो रही है।"

बीएलसी ने आरोप लगाया, "स्कूल में वैकल्पिक शिक्षकों की गैर-जरूरी व्यवस्था भी समस्या को बढ़ा रही है, जिसमें ड्यूटी पर तैनात शिक्षक की जगह कोई अन्य व्यक्ति पढ़ाने आता है।" संगठन के अनुसार, इससे नियमित कक्षाएं प्रभावित होती हैं और बिना उचित प्रशिक्षण के पढ़ाई कराई जा रही है।

संगठन ने यह भी कहा कि हाई स्कूल के रूप में पंजीकृत होने के बावजूद वहां माध्यमिक स्तर की कक्षाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण कई छात्राओं को आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है और बड़ी संख्या में लड़कियां उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित हो रही हैं।

बीएलसी ने बताया कि स्कूल में पर्याप्त कक्षाओं, पाठ्य पुस्तकों और साफ पीने के पानी की सुविधा का भी अभाव है, जिससे छात्राओं के सीखने का माहौल प्रभावित हो रहा है। संगठन ने बलूचिस्तान के शिक्षा अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर स्कूल की स्थिति सुधारने और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है।

इससे पहले बीएसएसी ने शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति की आलोचना की थी। संगठन ने इसे “अलोकतांत्रिक और दुर्भाग्यपूर्ण” बताया था।

बीएसएसी का आरोप है कि शिक्षकों और कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति का इस्तेमाल उनको अपने हक की आवाज उठाने से रोकने के लिए किया जा रहा है। संगठन ने दावा किया कि बलूचिस्तान में शिक्षकों की भारी कमी के कारण कई स्कूल काम नहीं कर पा रहे हैं और कुछ स्कूल केवल कागजों पर मौजूद “गोस्ट स्कूल” बनकर रह गए हैं।

बीएसएसी ने कहा कि बलूचिस्तान में शिक्षा की खराब स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। संगठन के अनुसार, सरकारें शिक्षा सुधार और साक्षरता बढ़ाने के दावे तो करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई इलाकों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही उचित स्कूल सुविधाएं उपलब्ध हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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