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लाडकी बहिन योजना से कोई पात्र महिला बाहर नहीं होगी: सीएम फडणवीस

मुंबई, 2 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत कोई भी पात्र महिला लाभ से वंचित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अपात्र लाभार्थियों को पहले दी गई राशि वापस नहीं ली जाएगी, हालांकि योजना का गलत तरीके से लाभ लेने वाले पुरुषों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लाडकी बहिन योजना से कोई पात्र महिला बाहर नहीं होगी: सीएम फडणवीस

मुंबई, 2 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत कोई भी पात्र महिला लाभ से वंचित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अपात्र लाभार्थियों को पहले दी गई राशि वापस नहीं ली जाएगी, हालांकि योजना का गलत तरीके से लाभ लेने वाले पुरुषों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

साप्ताहिक मंत्रिमंडल बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि हाल ही में किए गए केवाईसी (केवाईसी) सत्यापन और विभिन्न सरकारी डेटाबेस के मिलान के दौरान कई बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि योजना की शुरुआत में महिलाओं को दस्तावेज जुटाने के लिए पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से आवेदन प्रक्रिया को स्व-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) के आधार पर शुरू किया गया था। बाद में सरकार ने आयकर विभाग, सरकारी कर्मचारियों के वेतन पोर्टल, चारपहिया वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड और राशन कार्ड डेटाबेस समेत कई सरकारी अभिलेखों से लाभार्थियों की जानकारी का मिलान किया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, जांच में पता चला कि योजना का लाभ लेने वाली 5 लाख से अधिक महिलाएं सरकारी सेवा में कार्यरत थीं। वहीं करीब 10 लाख लाभार्थियों की वार्षिक आय निर्धारित सीमा 2.5 लाख रुपये से अधिक पाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लगभग 14 हजार पुरुष महिलाओं के लिए बनाई गई इस योजना का लाभ उठा रहे थे।

फडणवीस ने बताया कि पिछले नौ महीनों से लगातार आग्रह के बावजूद लाखों लाभार्थियों ने अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की। उन्होंने कहा कि संभावना है कि जिन लोगों ने केवाईसी नहीं कराया, वे पात्रता मानदंडों पर खरे नहीं उतरते थे। इसलिए ऐसे सभी खातों में लाभ राशि का वितरण तत्काल प्रभाव से बंद किया जाएगा।

हालांकि राज्य सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह फैसला किया है कि अपात्र महिलाओं को पहले से वितरित की गई राशि वापस नहीं ली जाएगी। लेकिन योजना का गलत लाभ लेने वाले 14 हजार पुरुषों से पूरी रकम वसूल की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, "इस योजना का दुरुपयोग करने वाले पुरुषों से एक-एक रुपये की वसूली की जाएगी।"

उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1.70 करोड़ पात्र महिलाओं ने सफलतापूर्वक केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर ली है और उन्हें हर महीने मिलने वाली वित्तीय सहायता जारी रहेगी।

फडणवीस ने कहा कि राज्य में किसी भी पात्र 'लाडकी बहिन' को योजना से बाहर नहीं किया गया है। केवल वे लोग लाभ से वंचित हुए हैं जो निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते या जिन्होंने अनिवार्य ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की।

उन्होंने बताया कि लगभग 80 लाख महिलाओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि वे या तो पात्रता मानदंडों पर खरी नहीं उतरीं या फिर उन्होंने केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की।

मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि कोई महिला स्वयं को पात्र मानती है लेकिन उसे लाभ नहीं मिल रहा है, तो सरकार उसके लिए केवाईसी प्रक्रिया की समय-सीमा फिर से खोलने पर विचार करेगी।

उन्होंने याद दिलाया कि योजना शुरू करते समय आय और आयु से संबंधित स्पष्ट मानदंड तय किए गए थे। सरकारी नौकरी करने वाले तथा चारपहिया वाहन रखने वाले लोग योजना के लाभ के पात्र नहीं थे।

फडणवीस ने कहा कि यदि शुरुआत में ही सभी आवेदनों का विस्तृत सत्यापन किया जाता तो योजना को लागू करने में एक से डेढ़ साल की देरी हो सकती थी। इसी कारण पहले लाभ वितरित किए गए और बाद में सत्यापन प्रक्रिया शुरू की गई।

उन्होंने कहा कि यह धन जनता का है और इसकी लेखा परीक्षा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा की जाती है। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि योजना का लाभ केवल पात्र लोगों तक ही पहुंचे। इसी उद्देश्य से केवाईसी सत्यापन अभियान चलाया गया और आठ महीने तक इसका अवसर उपलब्ध कराया गया।

--आईएएनएस

डीएससी

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