भारत के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए व्यापार में आसानी और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर करना होगा फोकस : नीति आयोग
नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। देश में पर्यटन की अपार संभावनाओं का प्रकाश डालते हुए नीति आयोग ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया कि भारत में पर्यटन को बढ़ाने के लिए व्यापार में आसानी और वीजा प्रक्रियाओं को सरल किया जाना चाहिए।
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक योगदान और रोजगार के नजरिए से भारत का पर्यटन क्षेत्र बहुत अहम है। वित्त वर्ष 2023-24 में इस क्षेत्र ने भारत की जीडीपी में 15.73 लाख करोड़ रुपए (170 अरब डॉलर) का योगदान दिया, जो कुल अर्थव्यवस्था का 5.22 प्रतिशत है। साथ ही, इसने अनुमानित 8.46 करोड़ लोगों को रोजगार दिया, जो पिछले पांच वर्षों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
नीति आयोग ने बताया कि घरेलू पर्यटन विकास का एक मुख्य कारण रहा है। 2024 में 2.9 अरब घरेलू पर्यटकों ने यात्राएं कीं, जो महामारी से पहले 2019 में दर्ज 2.3 अरब के उच्चतम स्तर से भी अधिक हैं।
भारत के पर्यटन स्थलों को दुनिया भर में पहचान मिली हुई है। देश में 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, 106 राष्ट्रीय उद्यान और 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं, साथ ही यहां तीर्थयात्रा और वेलनेस पर्यटन के स्थापित क्षेत्र भी मौजूद हैं।
हाल के वर्षों में इंटरनेशनल टूरिज्म में भी सुधार हुआ है। 2024 में भारत में कुल मिलाकर लगभग 2 करोड़ से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए और इससे लगभग 35 अरब डॉलर की प्राप्तियां हुई, जो 2023 के मुकाबले 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
हालांकि, दुनिया भर में आने वाले इंटरनेशनल टूरिस्ट में भारत की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत से भी कम है, जो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही कुल अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या अच्छी लग रही हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यटक की संख्या (2024 में करीब 1करोड़ ) टूरिज्म की असल मांग को अधिक सही ढंग से दिखाती है। यह संख्या महामारी से पहले के स्तर से नीचे है और थाईलैंड, मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में भी काफी कम है।
भारत के आकार और विविधता को देखते हुए, पर्यटन से होने वाली विदेशी मुद्रा की कमाई अभी भी कम है। साथ ही, भारत से बाहर घूमने जाने वाले पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे पता चलता है कि घरेलू मांग का एक हिस्सा बाहर जा रहा है। भारतीय यात्रियों द्वारा विदेश यात्रा पर खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है, जो महामारी से पहले के स्तर से लगभग 15 प्रतिशत ज्यादा है।
रिपोर्ट में कहा गया, "यह अंतर बताता है कि यात्रा की मांग तो मजबूत है, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा घरेलू पर्यटन इकोसिस्टम के बजाय अंतरराष्ट्रीय यात्रा से पूरा हो रहा है।"
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये कमियां उन बुनियादी ढांचागत बाधाओं की ओर इशारा करती हैं जो भारत की पर्यटन संपत्तियों और मांग को वास्तविक नतीजों में बदलने की क्षमता को सीमित करती हैं।
नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि भारत का पर्यटन क्षेत्र आर्थिक विकास, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने की अनूठी स्थिति में है।
गौबा ने कहा, "रिपोर्ट का एक मुख्य निष्कर्ष यह है कि भारत के पर्यटन क्षेत्र के सामने चुनौती मांग या संसाधनों की उपलब्धता की नहीं, बल्कि अनुकूल माहौल बनाने की है। मजबूत घरेलू पर्यटन और दुनिया भर में काफी दिलचस्पी के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन, निवेश और मूल्य प्राप्ति के मामले में नतीजे क्षमता से कम हैं। यह अंतर नियमों की जटिलता, बिखरी हुई संस्थागत प्रक्रियाओं और प्रक्रियागत अक्षमताओं के कारण है।"
--आईएएनएस
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