वैश्विक तनावों के बीच लगातार दूसरे सप्ताह गिरा बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी में आई 0.70 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट
मुंबई, 6 जून (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक इस सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। घरेलू स्तर पर उठाए गए कुछ सकारात्मक नीतिगत कदमों का असर वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी चुनौतियों के कारण सीमित रहा।
सप्ताह के दौरान निफ्टी 50 में 0.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को निफ्टी 0.21 प्रतिशत टूटकर 23,366 स्तर पर बंद हुआ।
वहीं, कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 116.67 अंकों यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,243.34 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों की धारणा पर लगातार दबाव बनाते रहे।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने से बाजार को बीच-बीच में राहत भी मिली।
एक बाजार विश्लेषक ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार पूरे सप्ताह सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और इसमें हल्का नकारात्मक रुख देखने को मिला। हालांकि सप्ताह के अंत में बाजार में कुछ सुधार भी देखा गया।
विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा उठाए गए तरलता बढ़ाने वाले कदमों और रुपए की स्थिरता ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
लेकिन आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती ने निवेशकों के उत्साह को कम किया और कई निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता अपनाया।
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों के लिए निवेश को आसान बनाना, बॉन्ड बाजार में कर संबंधी बाधाओं को कम करना और पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करना बाजार के लिए सकारात्मक कदम रहे।
इस दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ और 95 रुपए के स्तर से नीचे पहुंच गया।
निवेशकों ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने और रुपए को स्थिर बनाए रखने के लिए आरबीआई द्वारा किए गए प्रयासों का स्वागत किया।
कुल मिलाकर, बाहरी चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक मजबूती के कारण बाजार की धारणा सतर्क लेकिन स्थिर बनी रही।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशकों का ध्यान आरबीआई की सहयोगी नीतियों की निरंतरता, महंगाई की दिशा और बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) के रुख पर रहेगा।
उन्होंने कहा कि कंपनियों के तिमाही नतीजों का मौसम समाप्त हो चुका है, इसलिए अब बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। निवेशक आर्थिक विकास की गति और वैश्विक स्थिरता को लेकर अधिक स्पष्ट संकेतों का इंतजार करेंगे।
वहीं, व्यापक बाजार सूचकांकों का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों से अलग रहा। सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.57 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में केवल 0.16 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,450 से 23,550 का स्तर मजबूत प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) का काम कर सकता है, जबकि 23,250 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) बना हुआ है।
वहीं बैंक निफ्टी में 54,800 से 55,000 का स्तर क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध (इमीडिएट रेजिस्टेंस) क्षेत्र माना जा रहा है, जबकि 54,000 से 53,800 अंक का दायरा महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र बना हुआ है।
निवेशकों की नजर अब मानसून की प्रगति और उसके ग्रामीण मांग पर पड़ने वाले प्रभाव पर बनी हुई है।
वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं से जुड़ी प्रगति भी बाजार को नई दिशा दे सकती है।
--आईएएनएस
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