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एनआईए ने बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में स्थानीय नेता को किया गिरफ्तार

एनआईए ने बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में स्थानीय नेता को किया गिरफ्तार
एनआईए ने बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में स्थानीय नेता को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने से जुड़े मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मालदा जिले के एक स्थानीय नेता को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने कोलकाता स्थित ब्रांच कार्यालय में पूछताछ के बाद आरोपी को अपनी हिरासत में लिया। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम सायेम चौधरी उर्फ बाबू चौधरी है, जो मालदा के मोथबारी का रहने वाला है।

एनआईए की जांच से पता चला कि सायेम चौधरी 1 अप्रैल को बीडीओ कार्यालय के ब्लॉक-2 में न्यायिक अधिकारियों को गैर-कानूनी रूप से बंधक बनाने में शामिल मुख्य आरोपियों में से एक था। अधिकारियों ने बताया, "वह उस भीड़ का हिस्सा था, जिसने कानून-व्यवस्था में बाधा डाली और सरकारी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमले किए। इन हमलों में 9 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।"

जांच टीम के अनुसार, आरोपी ने घटना से एक दिन पहले बीडीओ कार्यालय के सामने भाषण दिया था, ताकि लोगों को हिंसक विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाया जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी बाबू चौधरी ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची थी और उन गैर-कानूनी सभाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया था, जिनमें एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हिंसा, डराने-धमकाने और बाधा डालने जैसी कोशिशें की गईं।

अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में एनआईए ने अब तक कुल 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

एनआईए राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले मालदा जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भीड़ के विरोध-प्रदर्शन और न्यायिक अधिकारियों को गैर-कानूनी रूप से बंधक बनाने से जुड़े एक दर्जन से अधिक मामलों की जांच कर रही है।

एनआईए ने कहा कि वह बड़े पैमाने पर चुनावों से पहले हुई हिंसा के पीछे की बड़ी साजिश के तहत अलग-अलग मामलों में शामिल सभी आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है। बता दें कि एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर इन मामलों की जांच शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में अप्रैल में हुई हिंसा का स्वतः संज्ञान लिया था।

--आईएएनएस

डीसीएच/

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