शिमला नर्सिंग कॉलेज में 19 छात्राओं को टीबी, एनएचआरसी ने मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने शिमला नर्सिंग कॉलेज में 19 छात्राओं को टीबी मामले को गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार से एक रिपोर्ट मांगी है।
यह रिपोर्ट एक मीडिया रिपोर्ट के बाद मांगी गई है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि शिमला के एक नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में 19 महिला छात्रों को टीबी (तपेदिक) हो गया है। इस संबंध में गुरुवार को एक अधिकारी ने जानकारी दी।
इस कथित घटना से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में आयोग ने दो हफ्तों के भीतर इस मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
खबरों के मुताबिक, परिसर के हाल ही में हुए दो निरीक्षणों के दौरान, हॉस्टल के प्रबंधन में कई गंभीर कमियां पाई गईं। इनमें साफ-सफाई और संस्थान के समग्र कामकाज से जुड़ी कमियां शामिल थीं। हालांकि, अधिकारियों द्वारा कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, और इसके परिणामस्वरूप, छात्रों को टीबी हो गया।
आयोग ने टिप्पणी की कि यदि मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला है।
2 मई को प्रकाशित हुई मीडिया रिपोर्ट में 31 मार्च और 17 अप्रैल को संस्थान में हुए दो निरीक्षणों के आधार पर कई कमियों को उजागर किया गया था।
एनएचआरसी के एक बयान के मुताबिक, हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को भीड़भाड़ वाली, सीलन भरी और अस्वच्छ परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है, जहां साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद अपर्याप्त है।
भोजन की गुणवत्ता भी खराब है और उसमें बुनियादी पोषण तत्वों की कमी है। कथित तौर पर बीमार होने पर भी छात्रों को आराम करने की अनुमति नहीं दी जाती और छुट्टियों के दिनों में भी उन्हें 'अस्पताल के कर्मचारियों' के तौर पर काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
एक अन्य मामले में एक अधिकारी ने बताया कि एनएचआरसी ने झारखंड सरकार और जिला पुलिस प्रमुख से दो हफ्तों के भीतर एक रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट देवघर जिले के चरकी पहाड़ी इलाके में स्थित एक रिमांड होम में रह रही 19 वर्षीय महिला कैदी की इस महीने की शुरुआत में हुई मौत के संबंध में मांगी गई है।
एनएचआरसी ने 2 मई को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें 19 वर्षीय महिला कैदी की मौत का जिक्र था। आरोप है कि यह मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। उसकी मौत का सही कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।
आयोग ने टिप्पणी की कि यदि मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला है।
आयोग ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव और देवघर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी करते हुए इस मामले पर दो हफ्तों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
4 मई को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब कैदी की हालत अचानक बिगड़ गई तो रिमांड होम के कर्मचारियों ने उसे तुरंत देवघर सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
एक बयान में कहा गया है कि कथित तौर पर 1 जनवरी 2026 से इस रिमांड होम के पांच कैदियों की मौत हो चुकी है, जिससे इसकी सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।
--आईएएनएस
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