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'ईरान के नए शासन ने अपने रुख में बदलाव किया', अमेरिका का दावा

वॉशिंगटन, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान में नेतृत्व में आए बदलाव के बाद उसकी बातचीत की रणनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। अमेरिकी ‘सेक्रेटरी ऑफ वॉर’ पीट हेगसेथ ने कहा कि लगातार अमेरिकी सैन्य दबाव के चलते तेहरान में “नया नेतृत्व” अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर हुआ है।
'ईरान के नए शासन ने अपने रुख में बदलाव किया', अमेरिका का दावा

वॉशिंगटन, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान में नेतृत्व में आए बदलाव के बाद उसकी बातचीत की रणनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। अमेरिकी ‘सेक्रेटरी ऑफ वॉर’ पीट हेगसेथ ने कहा कि लगातार अमेरिकी सैन्य दबाव के चलते तेहरान में “नया नेतृत्व” अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर हुआ है।

हेगसेथ ने कहा, “यह नया नेतृत्व अब हमारे साथ बातचीत को लेकर नई सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने इस बदलाव को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान हुए भारी सैन्य नुकसान से जोड़ा।

उन्होंने बताया कि मौजूदा नेतृत्व ऐसे समय में उभरा है जब ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक अधिकारी मारे गए या निष्क्रिय हो गए। उन्होंने कहा, “अब जो लोग नेतृत्व में हैं, उन्होंने अमेरिकी सेना की पूरी ताकत देख ली है।”

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यही कारण है कि ईरान युद्धविराम के लिए तैयार हुआ और बातचीत की मेज पर आया। हेगसेथ ने कहा, “इसी वजह से वे बातचीत के लिए आए, ताकि गोलीबारी रुके।”

पेंटागन की ब्रीफिंग में बताया गया कि इस सैन्य अभियान के दौरान ईरान के सैन्य, खुफिया और रक्षा ढांचे के कई वरिष्ठ अधिकारी या तो मारे गए या अक्षम हो गए, जिससे नेतृत्व में बड़ा बदलाव आया।

हेगसेथ ने कहा कि नए नेतृत्व के पास अब विकल्प सीमित हैं। यह नया नेतृत्व विकल्प और समय- दोनों से वंचित है, इसलिए उन्हें समझौता करना पड़ा।

अमेरिका ने इस बदलाव को औपचारिक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि युद्ध में हुए नुकसान का परिणाम बताया, जिसने तेहरान की निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित किया है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव के कारण ईरान अब वॉशिंगटन की शर्तें मानने को तैयार हुआ है, जिनमें उसके परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को फिर से खोलना शामिल है।

हेगसेथ ने कहा, “उन्हें पता है कि इस समझौते का मतलब है कि वे कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएंगे।”

हालांकि, अमेरिका ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के भीतर की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, खासकर जनता की भावना और भविष्य की शासन व्यवस्था को लेकर।

उन्होंने कहा, “मैं चाहूंगा कि ईरान की जनता इस मौके का फायदा उठाए,” साथ ही यह भी जोड़ा कि लोग पहले के शासन में दमन का सामना कर रहे थे।

फिर भी हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान का उद्देश्य शासन परिवर्तन नहीं था। उन्होंने कहा, “यह हमारा लक्ष्य नहीं था।”

अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि ईरान दोबारा संगठित होने या आक्रामक गतिविधियां शुरू करने की कोशिश करता है, तो अमेरिकी सेना जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

--आईएएनएस

डीएससी

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