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बंगाल सरकार ने पेश की नई औद्योगिक नीति; उद्योगपतियों के लिए प्रोत्साहन की घोषणा

बंगाल सरकार ने पेश की नई औद्योगिक नीति; उद्योगपतियों के लिए प्रोत्साहन की घोषणा
बंगाल सरकार ने पेश की नई औद्योगिक नीति; उद्योगपतियों के लिए प्रोत्साहन की घोषणा

कोलकाता, 5 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने गुरुवार को राज्य की नई औद्योगिक नीति का अनावरण किया। इसमें नए निवेश को आकर्षित करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन देने की घोषणा की गई है। इन प्रोत्साहनों में बिजली शुल्क (पावर टैरिफ) में छूट, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में नियोक्ताओं के योगदान में सहायता, स्टांप ड्यूटी से छूट, और मानव संसाधन विकास (एचआरडी) के क्षेत्र में राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली मदद शामिल है।

नई औद्योगिक नीति के अनुसार, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा, दोनों क्षेत्रों में नए निवेशों के लिए पांच साल तक बिजली शुल्क (टैरिफ) में छूट दी जाएगी। राज्य सरकार नई इकाइयां स्थापित करने के लिए किराए की जगह के मामले में भी वित्तीय सहायता देगी।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के क्षेत्र में, राज्य सरकार किफायती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराएगी और नई तकनीकों को लागू करने में भी मदद करेगी।

राज्य के औद्योगिक रूप से पिछड़े उप-मंडलों में नए निवेश प्रस्तावों के मामले में वित्तीय सहायता अधिक होगी। मेगा परियोजनाओं के मामले में, जहां प्रति एकड़ 50 नौकरियां पैदा होंगी, राज्य सरकार सड़कों के निर्माण और जल्द से जल्द पानी व बिजली के कनेक्शन सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करेगी।

राज्य सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन पर स्टांप ड्यूटी में छूट देने और मानव संसाधन विकास में सहायता देने का भी प्रस्ताव रखा है।

नई औद्योगिक नीति में कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) फंड से चलाए जाने वाले शैक्षणिक संस्थानों या अस्पतालों के लिए 100 प्रतिशत शुल्क छूट का प्रस्ताव है, बशर्ते संबंधित औद्योगिक घराना उस शिक्षा या चिकित्सा परियोजना में कम से कम 100 करोड़ रुपए का निवेश करे।

विभिन्न प्रोत्साहन प्रस्तावों में सबसे आकर्षक प्रस्ताव ईपीएफ में नियोक्ताओं (एम्प्लॉयर्स) के योगदान पर राज्य सरकार की सहायता से जुड़ा है, जिसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए रोजगार पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

एमएसएमई क्षेत्र में, राज्य सरकार महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए ईपीएफ में नियोक्ताओं के पूरे योगदान का खर्च 10 साल तक उठाएगी। एमएसएमई क्षेत्र में पुरुष कर्मचारियों के मामले में, राज्य सरकार इसी अवधि के लिए नियोक्ताओं के योगदान का 50 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी।

जिन इकाइयों में 200 से अधिक कर्मचारी हैं, वहां राज्य सरकार महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए नियोक्ताओं के योगदान का 75 प्रतिशत और पुरुष कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी।

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कम से कम 200 कर्मचारियों वाली और अन्य जगहों पर कम से कम 400 कर्मचारियों वाली बड़ी इकाइयों और मेगा परियोजनाओं के मामले में, ईपीएफ में नियोक्ताओं के योगदान का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा पांच साल तक वहन किया जाएगा। पुरानी औद्योगिक इकाइयों के विस्तार के मामले में रोजगार का सृजन करना होगा। प्लांट और मशीनरी में निवेश की स्थिति में, सामान्य इकाइयों के लिए कुल सहायता सीमा 100 प्रतिशत होगी।

'थ्रस्ट सेक्टर' (विशेष प्रोत्साहन वाले क्षेत्र) की इकाइयों के लिए यह 110 प्रतिशत और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (प्रायोरिटी सेक्टर) के लिए 120 प्रतिशत होगी। हालांकि, उत्पादन शुरू होने के बाद सहायता चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी।

नई औद्योगिक नीति में नई औद्योगिक इकाइयों के लिए मंजूरियां (क्लियरेंस) प्राप्त करने की समय-सीमा भी तय की गई है। इसके अनुसार, सभी आवेदन एक 'सिंगल-विंडो पोर्टल' के माध्यम से किए जाने चाहिए। इस पोर्टल पर 30 दिनों के भीतर 'सर्टिफिकेट ऑफ इंटेंट' (इरादे का प्रमाण-पत्र) जारी किया जाएगा, और उत्पादन शुरू होने के 45 दिनों के भीतर 'सर्टिफिकेट ऑफ एलिजिबिलिटी' (पात्रता प्रमाण-पत्र) दिया जाएगा।

--आईएएनएस

एससीएच

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