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'गंगा-महाकम विजन' के साथ हो भारत-इंडोनेशिया संबंधों की नई शुरुआत: इंडोनेशियाई संसद में पीएम मोदी

'गंगा-महाकम विजन' के साथ हो भारत-इंडोनेशिया संबंधों की नई शुरुआत: इंडोनेशियाई संसद में पीएम मोदी
'गंगा-महाकम विजन' के साथ हो भारत-इंडोनेशिया संबंधों की नई शुरुआत: इंडोनेशियाई संसद में पीएम मोदी

जकार्ता, 7 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए 'गंगा-महाकम विजन' का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को सभ्यतागत रिश्तों, विकास, सुरक्षा, समुद्री समृद्धि और ग्लोबल साउथ की साझा आवाज को मजबूत करने के आधार पर भविष्य की साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, प्रधानमंत्री के संबोधन में भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 'विकसित भारत 2047' और इंडोनेशिया के 'गोल्डन इंडोनेशिया 2045 (इंडोनेशिया एमास 2045)' के विजन का उल्लेख करते हुए व्यापार, निवेश, संपर्क, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

गंगा-महाकम विजन को लेकर पीएम ने कहा,"मैं आप सभी के सामने ‘गंगा-महाकम विजन’ रखना चाहता हूं। यह विजन हमारी साझेदारी को केवल वर्तमान की जरूरतों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और साझा प्रगति का रास्ता भी बनाता है। हम अपने सभ्यतागत संबंधों को नई पीढ़ी की सोच से जोड़ेंगे। रामायण से लेकर बोरोबुदुर तक, हम अपने साझा इतिहास को भविष्य की ताकत बनाएंगे। इसके लिए हमें ‘भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद’ शुरू करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि भारत, इंडोनेशिया के साथ मिलकर ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूत करने तथा स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया' से सम्मानित करने के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और इंडोनेशिया की जनता का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और गहरे संबंधों का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने कॉपीराइट की बात की। सम्मान पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता। सुबियांतो के साथ मेरी मित्रता भी किसी कॉपीराइट की सीमाओं में बंधी नहीं है।"

उन्होंने आगे कहा, "भले ही भारत और इंडोनेशिया की राजधानियों में हजारों किलोमीटर की दूरी हो, लेकिन समुद्र के रास्ते यह दूरी महज 150 किलोमीटर है। दुनिया के कई देशों में समुद्र, सीमाओं और दूरियों का प्रतीक रहा है, लेकिन भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र कभी दूरी का नहीं, बल्कि सेतु का प्रतीक रहा है। यही समुद्र हमारे साझा भविष्य का केंद्र है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपने संबोधन की जानकारी साझा करते हुए लिखा, "इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करना मेरे लिए सम्मान की बात है। भारत और इंडोनेशिया सदियों पुराने इतिहास, संस्कृति और लोगों के बीच मजबूत संबंधों से जुड़े हैं। हम मित्रता, सहयोग और साझा समृद्धि पर आधारित भविष्य के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।"

--आईएएनएस

केआर/

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