Samachar Nama
×

राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली पीएम के बीच फोन पर हुई वार्ता, अलग-अलग मोर्चों पर तालमेल बनाए रखने पर सहमति

राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली पीएम के बीच फोन पर हुई वार्ता, अलग-अलग मोर्चों पर तालमेल बनाए रखने पर सहमति
राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली पीएम के बीच फोन पर हुई वार्ता, अलग-अलग मोर्चों पर तालमेल बनाए रखने पर सहमति

यरूशलम, 10 जुलाई (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान में बताया कि दोनों नेताओं ने अपने देशों के बीच अलग-अलग मोर्चों पर तालमेल बनाए रखने पर सहमति जताई।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू के कार्यालय ने बयान में कहा, "इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू को खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।"

बयान में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल के बारे में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और उनके सहयोगियों की टिप्पणियों की गंभीरता का मुद्दा उठाया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि नेतन्याहू किन टिप्पणियों की बात कर रहे थे।

इजरायली अधिकारियों ने हाल ही में एर्दोगन की आलोचना की है। एर्दोगन ने इजरायल पर अमेरिका-ईरान कूटनीति को कमजोर करने का आरोप लगाया था और उसकी सरकार को 'युद्ध की आदी' बताया था। इजरायल ने तुर्की को एफ-35 लड़ाकू विमान बेचे जाने की संभावना पर भी चिंता जताई है।

हालांकि, नेतन्याहू और ट्रंप के बीच फोन पर यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब मंगलवार रात से गुरुवार तक अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से हमले हुए, जिससे तनाव और बढ़ गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों के जवाब में अमेरिका ने पिछले कुछ दिनों में ईरान के अंदर कई ठिकानों पर हमले किए, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ और बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंची।

इसी बीच, इजरायल के सैन्य प्रमुख एयाल जमीर ने कहा कि ईरान और लेबनान में हो रही गतिविधियों पर इजरायल बारीकी से नजर रख रहा है और तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार है। वहीं, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि सेना सतर्क है और अभियान फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।

इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा कि इजरायली सेना तब तक लेबनान में बनी रहेगी जब तक हिज्बुल्लाह के हथियार पूरी तरह से जब्त नहीं कर लिए जाते।

काट्ज के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "हमने लेबनान में घुसने के लिए किसी पक्ष से अनुमति नहीं मांगी थी और लेबनान में बने रहने के लिए भी हमें किसी अनुमति की जरूरत नहीं है।"

--आईएएनएस

डीसीएच/

Share this story

Tags