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मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना में तेजी से हो रही प्रोग्रेस

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना भारत के रेलवे विकास में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है। यह देश का पहला हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है जो स्पीड, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के वितरण में नए मानक स्थापित कर रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना में तेजी से हो रही प्रोग्रेस

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना भारत के रेलवे विकास में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है। यह देश का पहला हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है जो स्पीड, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के वितरण में नए मानक स्थापित कर रहा है।

सिविल निर्माण कार्य, पुल निर्माण और सुरंग निर्माण में हुई महत्वपूर्ण प्रगति परियोजना के पूरा होने की दिशा में निरंतर गति का संकेत देती है। अब तक किए गए निर्माण का पैमाना परियोजना के विभिन्न घटकों में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

साथ ही, एडवांस टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग सिस्टम को अपनाने से हाई-स्पीड रेल विकास में घरेलू क्षमताएं मजबूत हो रही हैं। कॉरिडोर पर पहली हाई-स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।

एमएएचएसआर परियोजना मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय को घटाकर दो घंटे से कम कर देगी। वर्तमान में सड़क मार्ग से इसी यात्रा में 8-9 घंटे और हवाई मार्ग से हवाई अड्डे की प्रक्रियाओं सहित लगभग 4-5 घंटे लगते हैं। तेज यात्रा से व्यावसायिक दक्षता में सुधार होगा और यात्रियों का बहुमूल्य समय बचेगा।

वर्तमान में, भारतीय रेलवे नेटवर्क में अधिकतम डिजाइन स्पीड लगभग 180 किमी प्रति घंटा है। इसके विपरीत, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना की डिजाइन स्पीड 350 किमी प्रति घंटा और परिचालन स्पीड 320 किमी प्रति घंटा है।

यह भारत में शुरू की गई सबसे व्यापक रेल अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है, और मुंबई और अहमदाबाद को लगभग 1 घंटे 58 मिनट में जोड़ेगी।

एमएएचएसआर परियोजना न केवल एक परिवहन पहल है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक उच्च गति रेल महत्वाकांक्षाओं के लिए उत्प्रेरक का काम भी करती है।

हाई स्पीड यात्री परिवहन प्रदान करने के अलावा, यह परियोजना पहली बार एक घरेलू हाई स्पीड रेल इकोसिस्टम भी स्थापित करेगी। इस इकोसिस्टम में वायडक्ट निर्माण, बैलास्टलेस ट्रैक की स्थापना, टनलिंग, ब्रिज लॉन्चिंग और स्टेशन-क्षेत्र नियोजन शामिल हैं।

इसमें सिग्नलिंग और बिजली व्यवस्था के साथ-साथ भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए विशेष प्रशिक्षण भी शामिल है। इस परियोजना के माध्यम से विकसित ज्ञान, कौशल और क्षमताएं देश भर में भविष्य के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों को सहयोग प्रदान करेंगी।

508 किलोमीटर लंबा एमएएचएसआर कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात, और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरता है। इस कॉरिडोर में मुंबई (बीकेसी), ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद, और साबरमती में 12 स्टेशन हैं। प्रत्येक स्टेशन को उसके मेजबान शहर के चरित्र और भावना को प्रतिबिंबित करने के लिए डिजाइन किया गया है। समकालीन वास्तुकला, आधुनिक सुविधाएं, और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी इनके डिजाइन का अभिन्न अंग हैं।

साबरमती स्टेशन को बुलेट ट्रेन, मेट्रो, बीआरटीएस और रेलवे नेटवर्क को जोड़ने वाले एक मल्टीमॉडल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। आसपास के क्षेत्र की योजना भी ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट सिद्धांतों के अनुसार बनाई जा रही है।

यह परियोजना जापानी शिंकानसेन तकनीक और परिचालन मानकों का उपयोग करके विकसित की जा रही है। इस कॉरिडोर में कर्षण, विद्युतीकरण, ट्रैक अवसंरचना और संचालन के लिए उन्नत प्रणालियां शामिल हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

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